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समय पर नहीं मिल रहे जहाज, खरीदार खफा, निर्यातक परेशान

भीलवाड़ा. देश के निर्यातकों को समय पर जहाज नहीं मिल पा रहे हैं। जहाज की कमी के चलते कंटेनर 10 से 15 दिन के विलंब से विदेश रवाना हो रहे हैं।

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सुरेश जैन

भीलवाड़ा. देश के निर्यातकों को समय पर जहाज नहीं मिल पा रहे हैं। जहाज की कमी के चलते कंटेनर 10 से 15 दिन के विलंब से विदेश रवाना हो रहे हैं। इससे जहां निर्यात करने वाले व्यापारियों को ब्याज समेत कई तरह का आर्थिक नुकसान हो रहा है। वहीं माल की समय पर आपूर्ति नहीं होने से खरीदार खफा हैं। इधर, राहत की बात यह है कि विदेशों से लगातार मांग बढ़ने से निर्यात में तेजी आई है। वस्त्रनगरी से रोजाना 20 से 25 कंटेनर टेक्सटाइल समेत विभिन्न उत्पाद विदेश जा रहे हैं।


भीलवाड़ा से कपड़ा, यार्न व डेनिम के अलावा अन्य उत्पाद निर्यात होता है। जहाज के अभाव में माल विदेश भेजने में देरी हो रही है। भीलवाड़ा से 600 से 750 कंटेनर टेक्सटाइल प्रतिमाह पोर्ट जाता है। इसके अलावा कई कंपनियां हैं, जिन्हें माल विदेश भेजने के लिए जहाज की आवश्यकता होती है।

पहले परिवहन, फिर जहाज की देरी-
निर्यातकों का कहना है कि भीलवाड़ा से बंदरगाह तक माल भेजने में तीन से चार दिन लगते हैं। वहां पहुंचने के बाद कस्टम की स्वीकृति मिलने व जहाज पर माल लोड करने में 10 से 15 दिन लग रहे हैं क्योंकि जहाज नहीं मिल रहे है। ऐसे में व्यापारी को ब्याज का नुकसान हो रहा है।

यह है प्रक्रिया-
कंटेनर के बंदरगाह पहुंचने पर पहले कस्टम विभाग निर्यात के लिए स्वीकृति देते हैं। इसे शिपिंग बिल (एसबी) कहा जाता है। इसके बाद जहाजरानी विभाग से जुड़ी जहाज कम्पनी बिल ऑफ लेडिंग (बीएल) जारी करते हैं, जो बिल्टी जैसी होती है। निर्यातक इस बिल्टी को आयातक को भेजते हैं, लेकिन देरी के कारण नहीं भेज पाते हैं।

एक कंटेनर में होता 60 लाख का माल-
एक कंटेनर में टेक्सटाइल उत्पाद की लागत कम से कम 60 लाख रुपए भारतीय मुद्रा में होती है। इस पर 10 प्रतिशत ब्याज गिने तो एक कंटेनर में 20 से 25 हजार का ब्याज का नुकसान होता है।

देश से बढ़ा निर्यात-
कोरोना व रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद निर्यात में तेजी आई है। भीलवाड़ा से 65 से 70 देशों में टेक्सटाइल भेजा जा रहा है। दक्षिण अमरिका व यूरोपीय देशों के अलावा बांग्लादेश के लिए जहाज नहीं मिल रहे हैं। पिछले साल भीलवाड़ा से 9 हजार करोड़ का टेक्सटाइल निर्यात हुआ। माना जा रहा है कि वर्ष 2022-23 में आंकड़ा बढ़ सकता है। हालांकि अभी इसके आंकड़े सामने नहीं आए।

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प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे-

जहाज के अभाव में अमरीका माल भेजने में दो माह लग रहे हैं जबकि चीन से एक माह में पहुंच रहा है। इस कारण निर्यातकों को काफी परेशानी हो रही है। अन्य देशों से कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है।
योगेश लढ्ढा, निर्यातक

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