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स्कूली बच्चों की ढाल बनी ‘स्पर्श’ मुहिम

18 लाख बच्चों ने सीखा गुड टच-बैड टच का अंतर

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'Sparsh' campaign became a shield for school children

'Sparsh' campaign became a shield for school children

बच्चों को ‘सेफ टच’ और ‘अनसेफ टच’ का फर्क सिखाने के लिए वरिष्ठ आईएएस नवीन जैन की ओर से शुरू की गई स्पर्श मुहिम ने 6 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस दौरान हजारों वॉलंटियर्स ने न केवल बच्चों को गुड टच-बैड टच के प्रति जागरूक किया, बल्कि उन्हें साइबर सुरक्षा, वर्चुअल टच और सोशल मीडिया से जुड़े खतरों से भी बचना सिखाया। सेठ मुरलीधर मानसिंहका बालिका विद्यालय में आयोजित सत्र में वॉलेटियर सारिका चतुर्वेदी ने छात्राओं को बताया कि कैसे वे अनसेफ टच की पहचान कर सकती हैं और ऐसी स्थिति में उन्हें क्या कदम उठाना चाहिए।

गुजरात सरकार ने भी किया आमंत्रित

सारिका चतुर्वेदी को गुजरात सरकार ने ‘गुड टच-बैड टच’ सिखाने के लिए विशेष वर्कशॉप आयोजित करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने अब तक गुजरात के सरकारी और निजी विद्यालयों में 60 से अधिक सत्र लेकर 10 हजार से ज्यादा बच्चों और शिक्षकों को प्रशिक्षित किया है। 2019 में आईएएस नवीन जैन की पहल पर मुहिम की शुरुआत हुई। आज 700 से अधिक प्रशिक्षित वॉलंटियर्स इस अभियान से जुड़े हुए हैं। 6,500 सरकारी-निजी स्कूल में इस तरह के सत्र हुए हैं। अब तक 18 लाख बच्चे और किशोरों को जागरूक किया है। सारिका चतुर्वेदी ने कहा कि आज बच्चे खुलकर अपने अनुभव साझा करते हैं और तुरंत मदद लेने का आत्मविश्वास दिखाते हैं।

शिक्षा विभाग भी प्रभावित

अभियान के सकारात्मक असर को देखते हुए शिक्षा विभाग ने कई जिलों में सरकारी स्कूलों में स्पर्श सत्र आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इससे बच्चों में आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना बढ़ रही है।