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जीएसटी की खामियों का फायदा उठा रहे टैक्स चोर

- अब तक लागू नहीं कर सकी जीएसटीआर-2 व 3
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Tax evaders taking advantage of GST's shortcomings in bhilwara

Tax evaders taking advantage of GST's shortcomings in bhilwara

भीलवाड़ा ।

केन्द्र सरकार ने आनन-फानन में जीएसटी लागू तो कर दिया, लेकिन इसमें रही खामियों का टैक्स चोर जमकर फायदा उठा रहे हैं। अब तक २५ हजार करोड़ से अधिक टैक्स चोरी के मामले सामने आ चुके हैं। भीलवाड़ा में लगभग तीन सौ करोड़ के बोगस बिल बना टैक्स चोरी के मामले सीजीएसटी व वाणिज्यिक कर विभाग ने पकड़े हैं। व्यापारी जीएसटी पोर्टल पर जीएसटीआर-1, जीएसटीआर 2 ए व जीएसटीआर-3 बी भर रहे हैं। जीएसटीआर 2 व 3 के लागू नहीं होने से करोड़ों की टैक्स चोरी हो रही है। भीलवाड़ा में भी गौरव जैन व सीए फर्म ने इसी का फायदा उठाया है।

टैक्स चोरी का खेल
जीएसटीआर-1

व्यापारी माल सप्लाई या बिल बनाता है, तो प्रत्येक बिल की जानकारी पोर्टल पर जीएसटीआर-1 भरता है। इसमें बिल के आधार पर दूसरा या सामने वाला व्यापारी माल क्रय करता है।


जीएसटीआर-2 ए

जीएसटीआर-1 में दर्शाई गई जानकारी जीएसटीआर-2 ए में नजर आती है। इस आधार पर व्यापारी इनपुट टैक्स क्रेडिट लेता है। यानी क्रेडिट उसके खाते में आ जाती है। क्रेडिट लेने वाला व्यापारी माल बेचता है तो जीएसटीआर-3 बी भरना पड़ता है। उसमें सरकार को टैक्स का भुगतान बता क्रेडिट पासऑन करता है। इसमें शातिर व्यापारी माल नहीं देकर केवल बिल जारी करते हैं।


यह भी कर रहे

जीएसटीआर-1 भरने के बाद जीएसटीआर-2 ए में क्रेडिट नजर नहीं आने पर भी क्रेडिट लिया जा सकता है। इसी का व्यापारी फायदा उठा रहे हैं। व्यापारी यह इसलिए कर पा रहे हैं, क्योंकि अब तक जीएसटीआर-2 व 3 लागू नहीं हुआ है। इस गड़बड़ी की विभाग को पोर्टल पर भी पूरी जानकारी नहीं मिलती है। एेसे में मिस मैचिंग नहीं पकड़ पा रहे हैं।

इसलिए भी गड़बड़ी

सरकार ने एक अगस्त 2018 से कपड़े पर बचे इनपुट टैक्स क्रेडिट रिफंड की घोषणा की थी। उसके बाद से यह खेल कुछ शातिर व्यापारी व सीए मिलकर फर्जी बिल बनाकर माल की खरीद व बिक्री दर्शा रहे हैं।


नहीं होता भौतिक सत्यापन

जीएसटी में आवेदन करने के बाद भौतिक सत्यापन नहीं हो रहा है। आवेदन के साथ ही अस्थाई जीएसटी नम्बर मिल जाते हैं। होना यह चाहिए कि आवेदन के बाद व्यापारी का भौतिक सत्यापन हो और इसके बाद स्थाई जीएसटी नम्बर जारी किया जाए। एेसे बोगस कम्पनियां बनाने से पहले ही खुलसा हो जाएगा।
गौरव दाधीच, कम्पनी सैक्रेट्री एवं कर सलाहकार