
The bridegroom, the bridegroom, arrived in the bullock cart, people said,
भीलवाड़ा।
भीलवाड़ा जिले के आसीन्द तहसील क्षेत्र के सुखामंड गांव से ८ किलोमीटर दूर रतनपुरा लाछुड़ा के लिए दूल्हे की अनोखी व निराली बारात निकली। देखकर लोग बोले बैलगाड़ी वाले दुल्हनिया ले जाएंगे दूल्हा अपनी दुल्हनिया को ब्याहने बारातियो संग बैलगाड़ी में पूरे धूमधाम के साथ रवाना हुआ। सुखामंड गांव के किसान चांदमल शर्मा के सुपुत्र राकेश शर्मा का ब्याह ७ दिसम्बर को रतनपुरा निवासी मधु के साथ हुआ। दूल्हा अपने परिवार व रिश्तेदारों व ग्रामीणों के साथ बैलगाडियो में सवार होकर रतनपुरा के लिए रवाना हुआ। बारात में गजब का उत्साह देखा गया। इस अनोखी बारात को देखने बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हुए।
बैलगाड़ी में ही दूल्हन की बिदाई
बैलगाड़ी में सवार होकर जहां दूल्हा रतनपुरा पहुंचा तो ८ दिसम्बर की सुबह दुल्हनिया की बिदाई भी बैलगाड़ी से सुखामंड गांव के लिए हुई। डेढ़ दर्जन से अधिक बैलगाडिय़ों में रंगरोदन के साथ मंगल मुहूर्त का संकेत केले के पत्तो व भगवा ध्वज से बैलगाडिय़ों को डेकोरेट किया गया है।
चर्चा का विषय बनी रहा बारात
सुखामंड गांव में बैलगाडियों से निकाली बारात चर्चा का विषय बन गई। यह अनूठी बारात पुरानी परंपराओं के अनुसार बैलगाड़ी पर सवार होकर निकली थी। बैलगाडियो के साथ ही गांव को भी भगवा ध्वज से सजाया गया। दूल्हे राकेश के पिता चांदमल शर्मा खेती करते हैं। उन्होंने अपने बेटे राकेश का विवाह अपने गांव से ८ किलोमीटर दूर स्थित रतनपुरा गांव के रहने वाली मधु से तय किया। शादी तय होने के बाद परिवार ने कुछ अनूठा करने का मानस बना लिया था। इसके तहत उन्होंने बारात बैलगाड़ी पर निकालने का फैसला लिया। आधुनिक युग में शादी को अनूठा बनाने के लिए दूल्हा हवाई जहाज या हेलीकाप्टर में बारात और बारातियों को ले जाना पसंद करता है, लेकिन इससे उलट राकेश की बारात बैलगाड़ी पर सवार होकर निकली। चांदमल का कहना है कि देश एक बार फिर रामराज्य की ओर बढ़ रहा है। पहले के समय में बारात ले जाने के लिए बैलगाड़ी ही मुख्य साधन हुआ करता था। उसी परंपरा के अनुसार बेटे राकेश की बारात भगवा ध्वज से सजी-धजी बैलगाडिय़ों में निकाली। सुखामंड से लेकर रतनपुरा तक गुजरी इस अनूठी बारात को देखने के लिए कुमावतों का खेड़ा, झालीमाता गांव, सोजी का खेड़ा, झाली चौराहा, गराडिया चौराहा, बीड़ा का खेड़ा होते हुए रतनपुरा पहुंचे तो हर गांव में लोग जमा होते गए और बैलगाड़ी में निकलने वाली बारात को देखा। करीब २ घंटे के सफर में रास्ते भर नाचते-गाते हुए पारंपरिक तरीके से निकलने वाली इस बारात का मजा लिया। बैलों को रंगा गया। चांदमल का कहना है कि बारात में कोविड.19 गाइड लाइन का पालन करवाते हुए बरातियों को मास्क वितरित किए और सैनेटाइज भी किया।
भीलवाड़ा सांसद सुभाष बहेडिया भी इस अनूठी बारात में शामिल हुए। बहेडिया ने कहा कि इस अनूठी बारात को देखकर उन्हें अपना बचपन याद आ गया। उन्होंने कहा कि वे भी बचपन में बैलगाड़ी में बारात में जाते थे।
Published on:
09 Dec 2020 09:17 pm
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