
सरकार ने मांगी धार्मिक स्थल पर इलाज करने वालों की सूची
भीलवाड़ा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी अब गांवों में घूमकर ऐसे धार्मिक स्थलों की सूची बनाएंगे, जहां मानसिक रोगियों का रुहानी या झाड़-फूंक के नाम पर इलाज किया जा रहा है। भूत-प्रेत भगाने के नाम पर मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायत मिली तो ओझा और पीरजादा पर कार्रवाई की जाएगी।चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने प्रदेश के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (स्वास्थ्य) राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी से ३० मार्च तक ऐसे स्थलों की सूची मांगी है।
विभाग ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में इस बारे में याचिका लंबित है। चिकित्सा विभाग पक्षकार है। राजस्थान के ऐसे धार्मिक स्थानों की सूचीर मांगी है, जहां आस्था के नाम पर झाड़ा फंूक से इलाज का दावा किया जाता है।
चिकित्सा विभाग के अनुसार कोर्ट ने अपने आदेश में फेथ हीलिंग यानी आस्था आधारित उपचार से जुड़ा बताया है। कोर्ट ने सरकार को फेथ हीलिंग के नाम पर धार्मिक स्थलों पर मानवाधिकार उल्लंघन तुरंत रोकने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह जिलों में ऐसे सभी धार्मिक स्थलों और मानसिक उपचार और केंद्रों की पहचान करें जहां मानसिक रोगियों का इलाज किया जाता है।
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मान्यता के चलते एेसा
जानकारों का कहना है कि मानसिक रोगियों को रूहानी इलाज के लिए लोग कई स्थानों पर ले जाते है। मान्यता है कि कुछ स्थानों पर बुरी आत्माओं से छुटकारा मिलता है। रोगी पर बुरी आत्मा का साया है तो झाड़-फूंक या ओझाई की जरूरत है। ऐसे मरीजों को अक्सर बेडियों और जंजीरों में बांधा जाता है, जो मानवाधिकार का हनन है।
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यह कहता है मानसिक स्वास्थ्य कानून
मेंटल हेल्थ केयर एक्ट मनोरोगियों को दिमागी स्वास्थ्य की देखभाल और सेवा की गारंटी देता है। सुनिश्चित करता है कि किसी भी मानसिक रोगी के साथ भेदभाव न हो। उसे प्रतिष्ठा के साथ जीने का अधिकार मिले। यह आत्महत्या को भी अपराध मुक्त करता है।
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जिले में एक भी स्थान नहीं
जिले में एक भी स्थान ऐसा नहीं है, जहां पर चिकित्सा के नाम पर झाड़ा फूंक किया जाता हो। फिर भी इसकी जानकारी जुटा रहे हैं।
डॉ. मुस्ताक खान, सीएमएचओ
Published on:
29 Mar 2021 04:07 pm
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