ये जड़ी बूटियां
होलिका दहन के दौरान आम, गूलर, बट,पीपल,खेर,चंदन, साल चंदन,श्वेत चंदन,पीला चंदन, अगर तगर, शर्मी, अर्क, तुलसी, नीम आदि वृक्षों, नव फ सल, सूखा मेव, मिश्री खजूर, गिलोय तज, तुलसी,मंजीर,भोजपत्र, लज्जावती,शीतल चीनी, भीम सेनी कपूर, देवदारू, नागर मोथा, बिल्व, वाकूघ्घ्ची, केशर, पलाश, पुष्प, जायफ ल, इन्द्र जव, गूगल, पुष्कर, मूल, कमलगट्टा,जावन्वी,जमीठ, कपूर, काचरी,तेजपत्र समेत 111 प्रकार की दिव्य औषधियों का उपयोग किया जा सकता है। ये बूटिया देशी घी में मिला कर होली में प्रति व्यक्ति दाहिनी हाथ से सात बार गायत्री मंत्र से आहूतियां दे तो पर्यावरण शुद्ध हो सकेगा