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होलिका से उठेगी हवन की महक

राजसमंद हाईवे पर नौगांवा स्थित परम पूज्य माधव गो विज्ञान अनुसंधान संस्थान की गो शाला ने प्रदेश व जिले में वैदिक होलिका की पहचान दी है। इसी के तहत शहर में सौ स्थानों पर होलिका दहन कार्यक्रम होंगे।

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The smell of havan will rise from Holika

The smell of havan will rise from Holika

भीलवाड़ा। राजसमंद हाईवे पर नौगांवा स्थित परम पूज्य माधव गो विज्ञान अनुसंधान संस्थान की गो शाला ने प्रदेश व जिले में वैदिक होलिका की पहचान दी है। इसी के तहत शहर में सौ स्थानों पर होलिका दहन कार्यक्रम होंगे।

चार साले से गोबर के कण्डों की होली जलाने के अभियान से जुड़ी गोशाला ने इस साल दो लाख गोबर के कंडे तैयार किए है। इसी बीड़े को अंजाम देने के लिए माधव गो शाला से जुड़े संगठनों की संख्या भी 50 पार हो गई है। इतना ही नही कण्डों में हवन पूजा की सामग्री का उपयोग किए जाने से कोरोना संकट काल में होलिका दहन के दौरान माहौल कही अधिक पवित्र व भक्तिमय होगा।

वैदिक होली की खाशियत ये रहेगी की इस बार गोबर से निर्मित लकडिय़ां भी होलिका दहन में जलेगी। हजारों की तादाद में होलिका को अर्पित करने के लिए बड़बुलों की मालाएं भी तैयार की गई है। इस बार गुलाब व पालक सहित अन्य प्राकृतिक वस्तुओं से हर्बल गुलाल भी तैयार किया गया। भीलवाड़ा के अभिषेक पंचोली ने बताया कि वह गत चार साल से क्षेत्र में कंडों की होली जला रहे है। यह पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित है।

संस्थान के प्रतिनिधि गोविन्द सोडाणी ने बताया कि संस्थान होलिका दहन के लिए कण्डे उपलब्ध कराने के साथ ही वैज्ञानिक पद्धति से होलिका दहन करने के लिए जागरूकता भी फैला रहा है। उन्होंने बताया कि विदेशों में हुए अनुसंधान से निष्कर्ष निकला कि एक ही तिथि व समय में सार्वजनिक रूप से 111 प्रकार की दिव्य औषधियों व गोबर के कण्डों से वैदिक पद्धति द्वारा होलिका दहन की जाए तो उसकी गैस से और आहुति पश्चात अग्नि प्रदक्षिणा करे तो शरीर में बढे कफ दोष का शमन होता है और संक्रामक रोगो से बचा जा सकता है। ऐसे में कारोना वायरस समेत अन्य वायरस से मुक्ति मिलेगी।

वैदिक होलिका दहन

वैदिक होलिका दहन के लिए अनेकों जड़ी बूटियां है जो कि गायत्री परिवार व पंतजलि केन्द्र से प्राप्त की जा सकती है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर की गई इस पहल के तहत होलिका दहन आयोजन समितियों को कण्डे उपलब्ध कराकर उनसे पेड़ों की कटाई नही करने व जहां तक हो सके गोबर के कण्डे व बड़बुलियों का प्रयोग करने का आग्रह किया जा रहा है। होलिका दहन के लिए प्रतिवर्ष सैकड़ो पेड़ों की कटाई होती है। इसे रोकने के लिए संस्थान ने पेड़ों की कटाई नही करने के आग्रह के साथ गोबर के कण्डे रियायती दर में देने की व्यवस्था शुरू की है।

इस बार दो लाख कण्डे
गो शाला समिति के अजीत ने बताया कि समिति गत चार साल से गोबर के कण्डे तैयार कर लोगों को मामूली दाम पर उपलब्ध करा रही है। समिति ने इस बार गोबर के कण्डों की संख्या दो लाख से अधिक की है। बड़ी संख्या में कण्डों का वितरण कार्य भी नि:शुल्क परिवहन के जरिए शुरू किया जा चुका है।

ये जड़ी बूटियां
होलिका दहन के दौरान आम, गूलर, बट,पीपल,खेर,चंदन, साल चंदन,श्वेत चंदन,पीला चंदन, अगर तगर, शर्मी, अर्क, तुलसी, नीम आदि वृक्षों, नव फ सल, सूखा मेव, मिश्री खजूर, गिलोय तज, तुलसी,मंजीर,भोजपत्र, लज्जावती,शीतल चीनी, भीम सेनी कपूर, देवदारू, नागर मोथा, बिल्व, वाकूघ्घ्ची, केशर, पलाश, पुष्प, जायफ ल, इन्द्र जव, गूगल, पुष्कर, मूल, कमलगट्टा,जावन्वी,जमीठ, कपूर, काचरी,तेजपत्र समेत 111 प्रकार की दिव्य औषधियों का उपयोग किया जा सकता है। ये बूटिया देशी घी में मिला कर होली में प्रति व्यक्ति दाहिनी हाथ से सात बार गायत्री मंत्र से आहूतियां दे तो पर्यावरण शुद्ध हो सकेगा