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सूदखोरों के जाल में फंसे एमपी के युवक ने खाया जहर, मूलधन का दुगना ब्याज दिया, फिर भी नहीं चुका कर्जा

शहर में फिर सूदखोरों का आतंक सामने आया

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Usurer terror in bhilwara

Usurer terror in bhilwara

भीलवाड़ा।

शहर में फिर सूदखोरों का आतंक सामने आया। इस बार मूलत: मध्यप्रदेश का युवक सूदखोरों के जाल में फंसा। जितना मूलधन था। उसका दुगना ब्याज दे दिया। फिर भी कर्जा नहीं उतरा। सूदखोरों की धमकियों से परेशान होकर आखिर युवक ने सोमवार को जहर खाकर जान देने का प्रयास किया। प्रतापनगर पुलिस ने उसके बयान के आधार पर दो जनों के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने के प्रयास का मामला दर्ज किया है।


सहायक उपनिरीक्षक साबिर मोहम्मद के अनुसार एमपी के नयागांव हाल आजादनगर निवासी किशोर पालीवाल कपड़ा का व्यवसाय करता है। उसने व्यवसाय के सिलसिले में दीपक अरोड़ा से 50 हजार तथा ललित सोमाणी से 70 हजार रुपए उधार लिए। दोनों 15 से 20 प्रतिशत ब्याज वसूल रहे थे। रिपोर्ट में किशोर ने बताया कि मनमाना ब्याज वसूला जा रहा था। मूल रकम से ज्यादा ब्याज दे दिया। ब्याज नहीं दे पाने की स्थिति में दोनों ने उसे परेशान कर दिया। मोबाइल पर धमका रहे थे। फोन नहीं उठाया तो घर आ गए। जीना दुुुश्‍वार हो गया। इसके चलते जहर खा लिया।

जहर खाने के बाद लोग टेम्पो से उसे प्रतापनगर थाने लेकर पहुंचे। इससे पुलिस हरकत में आ गई। थाने पर हड़कम्प मच गया। मामला सूदखोरों का सामने आया। तत्काल एमजीएच पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उसके बयान लिए गए।

ऐसे फंसाते हैं...
सूत्रों के अनुसार, सूदखोर कर्ज लेने वाले व्यक्ति को कानूनी दांवपेच में इस कदर उलाझते है कि वो व्यक्ति चाह कर भी अदालत या पुलिस की कानूनी शरण नहीं ले पाता। मजबूरी में पैसा उधार लेने वाला व्यक्ति कोरे स्टाम्प पर हस्ताक्षर करने होते है। कोरे स्टाम्प और खाली चैक देने पर सूदखोर कर्जदार को ब्लैकमेल करते रहते है।

सीएम को शिकायत, कार्रवाई का इंतजार
मालूम हो, सूदखोरों के आतंक से परेशान होकर 17 फरवरी 2018 को पंचवटी के कपड़ा व्यापारी अशोक कृपलानी ने आजाद चौक में कॉम्प्लेक्स की चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी थी। आत्महत्या से पूर्व उसने वीडियो बनाया जिसमें सूदखोरों के आतंक को जगजाहिर किया। गत माह भाजपा नेता अशोक सिसोदिया ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख उनके बेटे को सूदखोरों के परेशान करने की पीड़ी जताई थी। शहर में हजारों लोग सूदखोरों के जाल में फंसे हैं। ज्यादातर नौकरीपेशा लोग सूदखोरी के शिकार है। इनसे पैसे वसूलने की गारंटी होती है। आर्थिक मजबूरी, जुए और शराब के आदी सूदखोरी के दलदल में फंसते जा रहे है।

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