
कागज में ड्यूटी लगी और हकीकत में चौकीदार ही रात का काम संभाल रहा है। सुनने में भले ही यह अटपटा लगे लेकिन जल संसाधन विभाग (सिंचाई विभाग) ने संवेदनशील मानी जाने वाली अस्थाई शाखा बाढ़ नियंत्रण कक्ष में ऐसी ही कारगुजारी कर रखी है। रात में बाढ़ नियंत्रण कक्ष का जायजा लिया तो सामने आई यह हकीकत।
अजमेर चौराहे के निकट विभाग के कार्यालय में 15 जून को बाढ़ नियंत्रण कक्ष शुरू हुआ। तीन शिफ्ट में कर्मचारी लगाने का दावा किया गया। पहली शिफ्ट सुबह 6 से दोपहर 2 बजे, दूसरी दोपहर 2 से रात 10 बजे तथा तीसरी रात 10 से सुबह 6 बजे तक तय की। हर शिफ्ट में लिपिक, तकनीकी सहायक, चौकीदार व अन्य स्टाफ बारी-बारी से लगाया। बकायदा आदेश भी जारी हुए। रात में अधीक्षण अभियंता (एसई) कार्यालय के लिपिक सुरेश शर्मा को लगाया। इनके सहयोग के लिए अधिशाषी अभियंता कार्यालय के फोरमैन केसरसिंह और चौकीदार पन्नालाल को तैनात किया।
एसई ने रिलीव नहीं किया इसलिए बिगड़ी व्यवस्था
दरअसल कागज में सुरेश शर्मा कक्ष के प्रभारी हैं लेकिन उनको एसई आरके पारीक ने अपने दफ्तर से रिलीव ही नहीं किया। यही हठधर्मिता अधिशाषी अभियंता (द्वितीय) एनके बड़वाना ने भी की। एक्सईएन कार्यालय के फोरमैन केसरसिंह को भी सवा महीने से रिलीव नहीं किया गया। इसके चलते कंट्रोल रूम चौकीदार के भरोसे चल रहा है।
दो बार लिखा पत्र, भेजो कर्मचारी
कंट्रोल रूम के नोडल प्रभारी अधिशाषी अभियंता (प्रथम) जमील अख्तर ने उच्चाधिकारी होने से एसई से पत्र व्यवहार नहीं किया जबकि बराबर अधिकारी अधिशाषी अभियंता बड़वाना को दो बार केसरसिंह को रिलीव करने का पत्र लिखा।
सवाल, जो मांगते हैं जवाब -
- आपात सेवा मानी जाने वाले बाढ़ नियंत्रण कक्ष में इतनी बड़ी लापरवाही क्यों?
- बाबू-फोरमैन को रिलीव नहीं करने के पीछे अधिकारियों की क्या मंशा रही?
- रिलीव ही नहीं करना था तो उनके नाम का आदेश जारी क्यों किया गया?
- आपदा से रात में कैसे निपटा जाएगा, अधिकारियों से समन्वय कैसे बैठा पाएंगे?
Published on:
25 Jul 2017 12:02 pm
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