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भीलवाड़ा में हम हो गए तीस लाख

औद्योगिक क्रांति एवं विकास से भीलवाड़ा जिले की आबादी तीस लाख के करीब पहुंच गई, वही शहर में भी जनसंख्या पांच लाख के पास आ गई है। जिले में पिछले एक दशक के छह लाख की आबादी बढ़ी है शहर की जनसंख्या में भी करीब डेढ़ लाख का इजाफा हुआ है।

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We have become three million in Bhilwara

We have become three million in Bhilwara

भीलवाड़ा । औद्योगिक क्रांति एवं विकास से भीलवाड़ा जिले की आबादी तीस लाख के करीब पहुंच गई, वही शहर में भी जनसंख्या पांच लाख के पास आ गई है। जिले में पिछले एक दशक के छह लाख की आबादी बढ़ी है शहर की जनसंख्या में भी करीब डेढ़ लाख का इजाफा हुआ है। डेढ़दशक पूर्व तक शहर पांच किलोमीटर के दायरे में ही था, लेकिन अब यह दायरा पन्द्रह किलोमीटर तक फैल गया हैं। मांडल, शाहपुरा व सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र के गांव शहरी क्षेत्र में आ रहे हैं। गांवों को छूने लगा है। जिले की आबादी का सटीक आंकडा इस साल सामने आ जाता, लेकिन देश में कोरोना संक्रमण के कारण वर्ष 2020 में होने वाली जनगणना अब तक शुरू नहीं हो पाई।

औद्योगिक विकास होने के कारण भीलवाड़ा जिले में आबादी तेजी से बढ़ी है। यहां यूपी, बिहार, एमपी, पंजाब, झारखंड, महाराष्ट्र, गुजरात समेत देश के विभिन्न हिस्सों से लोग बसे हुए है। बढ़ती आबादी के अनुकूल यहां का नगर नियोजन नहीं होने से आंतरिक ढांचा सुदृढ़ नहीं हो सका है। पिछले एक दशक अच्छी बात यह रही कि जिले में रेलवे का विद्युतिकरण हो गया और हाइवे की सड़के सिक्सलेन में तब्दील हो रही है।

बढ़ गई कालोनियां

शहर में वर्ष 2011 की आबादी करीब साढ़े तीन लाख थी। वर्ष २००० शहर में कॉलोनियों की संख्या करीब 35 थी, लेकिन वर्ष 2021 में शहर की आबादी करीब पांच लाख और कॉलोनियों की संख्या करीब 130 हो गई, इनमें 58 कॉलोनियां बिल्डर्स ने विकसित की है। शहर की कॉलोनियां आरजिया चौराहा, नया समेलिया, आटूण,पुर, सुवाणा, पालड़ी, जोधडास तक पहुंच गई है।

सात दशक पूर्व थे साढ़े छह लाख
जिले में आबादी की बढ़ती रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 1931 से 1941 के मध्य दस वर्ष में जिले की आबादी एक लाख 2 हजार 103 बढ़ी, जबकि अब हर वर्ष करीब 50 हजार आबादी बढ़ रही है। वर्ष 2001 की जनगणना में जिले की जनसंख्या 20 लाख 13 हजार 789 थी, जो 2011 की जनगणना में २४ लाख आठ हजार ५२६ हो गई। वर्ष 2021 के अंत में जिले की आबादी का आंकड़ा ३० लाख तक पहुंचने का अनुमान है।

शहर एवं जिला अभी भी प्यासा
जिले में बढ़ती आबादी के साथ ही पेयजल संकट की स्थिति गहराई हुई है। जिले में वर्ष 2013 से चम्बल पेयजल परियोजना पर काम हो रहा है, लेकिन भीलवाड़ा शहर की 30 फीसदी आबादी को चम्बल का पानी नहीं मिल सका है। पचास फीसदी ग्रामीण हिस्सा अभी भी प्यासा है।

यूं बढ़ी जिले की जनसंख्या

वर्ष जनसंख्या

1931 530025

1941 632128

1951 728522

1961 865797

1971 1054890

1981 1310379

1991 1593128

2001 2013789

2011 240856

2021 30 ,००,००० संभावित

इनका कहना है

'' आबादी के आंकड़े के आधार पर शहर एवं जिले की विकास योजना बनती है, सरकारी योजनाओं का खाका भी आबादी के अनुसार ही तय होता है। जिले की कुल आबादी करीब २९ लाख से अधिक है। शहर की आबादी करीब पांच लाख की है। राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग की तरफ से प्रत्येक दस साल में जनगणना प्रस्तावित है। फरवरी 2021 में आंकड़े जारी होने थे, लेकिन कोरोना संकट काल के कारण वर्ष 2020 में जनगणना नहीं हो सकी, जनगणना इस साल प्रस्तावित है।

- बीएल आमेटा, जिला सांख्यिकी अधिकारी भीलवाड़ा