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भीलवाड़ा

‘अर्थी’ पर मारी झाड़ू तो मुर्दा उतरकर भागा

घोड़े, ऊंट, बैलगाड़ी का लवाजमा। गुलाल से सने चेहरे और हाथों में झाड़ू लिए लोग। साथ चल रही थी-अर्थी, जिस पर लेटे 'मुर्दे' को साथ चल रहे लोग पीट रहे थे। मुर्दे को गालियां दी जा रही थी।

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भीलवाड़ा. घोड़े, ऊंट, बैलगाड़ी का लवाजमा। गुलाल से सने चेहरे और हाथों में झाड़ू लिए लोग। साथ चल रही थी-अर्थी, जिस पर लेटे ‘मुर्दे’ को साथ चल रहे लोग पीट रहे थे। मुर्दे को गालियां दी जा रही थी। यह नजारा बुधवार दोपहर को शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी सनेती यानी अर्थी पर लटे परम्परागत मुर्दे की सवारी का था। यह सवारी 200 साल से शीतला अष्टमी पर निकाली जा रही है। अर्थी पर सवार जिंदा युवक (मुर्दे) पर बार-बार वार किया जाता है। वह कई बार अर्थी से उतर गया, लेकिन लोगों ने पकड़ कर फिर बैठा दिया।

चित्तौड़वालों की हवेली के बाहर से दोपहर सवा दो बजे शवयात्रा शुरू हुई। जीवित व्यक्ति को अंतिम यात्रा में शामिल लोग गुलाल-अबीर उड़ाते व हंसी-ठिठोली करते चल रहे थे। जिस मार्ग से यात्रा गुजरी, सड़क गुलाल से अट गई। सनेती के प्रति लोगों में उत्साह देखा गया।

उस वक्त ठहाके लगे, जब सनेती पर मुर्दे के रूप में सवार युवक कूदकर भागने लगा। लोगों ने पकड़कर जबरन फिर अर्थी पर लेटाया। बड़े मंदिर के पास अर्थी से मुर्दा उतर भागा। युवाओं ने उसे पकडऩे का प्रयास किया लेकिन वह भीड़ में गुम हो गया। बाद में केवल अर्थी को बड़े मंदिर के पीछे बहाले तक ले जाया गया। युवाओं ने ढोल की थाप पर जमकर नृत्य किया।

पैसे नहीं, मूंगफली वारी
मुर्दे की सवारी को देखने बड़ी संख्या में महिलाएं व युवतियां मुख्य बाजार में खड़ी थी। सवारी में सबसे आगे चार घोड़े चल रहे थे। पीछे ऊंट गाड़ी में बैठे युवक गुलाल उड़ा रहे थे। इनके साथ रिक्शे में ईलाजी को बिठाया गया था। रिक्शे में सवार लोग सनेती पर मूंगफली वार रहे थे।अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चंचल मिश्रा, सीओ सदर रामचन्द्र चौधरी, उपाधीक्षक राहुल जोशी, सीओ शहर नरेन्द्र दायमा आदि मौजूद थे। ड्रोन से मुर्दे की सवारी पर नजर रखी गई।