
महिला शक्ति का कमाल: छोटी शुरुआत, बड़ा कारोबार
भीलवाड़ा. उद्योग नगरी भीलवाड़ा की नारी शक्ति आत्म निर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही है। इसके लिए विभिन्न लघु उद्योग जरिया बन रहे हैं। लघु उद्योगों की कमान संभालते कई महिलाओं ने छोटे से शुुरुआत की लेकिन आज उनका कारोबार वृहद रूप ले चुका। ये लोगों को रोजगार से जोड़ने में अहम साबित हो रहे हैं। राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस पर ऐसी महिला कारोबारियों पर विशेष रिपोर्ट, जिन्होंने छोटी शुरुआत की लेकिन आज कारोबार के क्षेत्र में कामयाबी का परचम लहरा रही हैं-
विमला मुनोत: वकालत छोड़ खुद का उद्योग लगाया
बापूनगर निवासी विमला ने एमकॉम व एलएलबी के बाद भीलवाड़ा सेशन कोर्ट में प्रैक्टिस की। फिर 15 साल पहले कंटीले तार की जाली और वेल्डिंग जाली निर्माण का उद्योग लगाया। शुरू में हाथ से चलने वाली मशीनें थी, जो अब ऑटोमेटिक हैं। उद्योेग एमएसएमई में रजिस्टर्ड है। 18 से 20 कर्मचारी हैं। 7 करोड़ का टर्नओवर है। लघु उद्योग भारती की महिला इकाई बनाई, जिसकी खुद अध्यक्ष हैं। जिले के अलावा पड़ोसी जिलों व राज्यों में भी उत्पाद भेजती है।
नीता बंसल: ऑर्गेनिक से हैंडलूम उद्योग तक
वकील कॉलोनी निवासी नीता बंसल ने 10 वर्ष पहले महज 11 हजार रुपए से बेडशीट व्यवसाय शुरू किया।आज यह लाखों का टर्नओवर में बदल चुका है। नीता बताती हैं, पहले घर पर बालों व चेहरे संबंधी ऑर्गेनिक उत्पाद बनाती थी। इसका रिजल्ट भी अच्छा मिला। हैंडलूम व अन्य उत्पाद की जयपुर, नीमच, रतलाम, किशनगढ़ आदि जगह प्रदर्शनी लगाई है। नीता का सपना इस व्यवसाय को शोरूम तक ले जाना है। उनकी राय है कि व्यवसाय में रुचि रखने वाली महिलाओं को आत्म विश्वास के साथ छोटी पूंजी से अपना व्यवसाय शुरू करना चाहिए।
प्रेरणा सोमानी : कोराना में स्कूल बंद, तलाशी नई राह
हरणी कलां राधेनगर निवासी प्रेरणा सोमानी ने इंदौर से पढ़ाई पूरी की। भीलवाड़ा में विवाह के बाद निजी विद्यालय में शिक्षिका रही लेकिन कोरोना काल ने हालात बदल दिए।पति कोरोना से पीडि़त हुए। स्कूल-कॉलेज बंद हुए तो मानदेय भी बंद हो गया। घर में आय के साधन नहीं थे। नई राह तलाशी। पिता की प्रेरणा से तेल, साबुन, उबटन, फेसपेक आदि का छोटे स्तर पर उत्पादन शुरू किया। इसमें केमिकल नहीं होने से कई परिवारों ने अपनाया। 7 हजार रुपए से शुरू उद्योग अब आगे बढ़ रहा है। अब प्रदर्शनी व मेलों में दुकान लगाना शुरू किया। हर्बल कॉस्मेटिक्स की मांग बढ़ने से उत्पादन भी बढ़ाया हैं।
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इंद्रा असावा : हर्बल उत्पाद में आगे बढ़ रही
महावीर कॉलोनी की इंद्रा असावा ने कम पूंजी से हर्बल उत्पाद का काम शुरू किया। आज इस उत्पाद को बनाने में पांच से अधिक महिला कर्मचारी लगी है। हर्बल साबुन, शैंपू व क्लीनिंग उत्पाद की मांग तेजी से बनी हुई है। उद्योग का रजिस्ट्रेशन करा रखा है ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। इंद्रा बताती हैं कि महिला उद्यमी थोड़ा ध्यान दे, तो सरकार की कई योजनाओं का लाभ उठा सकती है। इसमें ब्याज में भी सब्सिडी मिलती है।
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पल्लवी लढ़ा: मनोमय को दिलाया एक्सपोर्ट अवार्ड
पल्लवी लढा ने 2003 में फाइनेंस में एमबीए किया। 2010 में जैकएनजिल के नाम से खिलौनों और स्टेशनरी की रिटेलिंग की। 2016 में टेक्सटाइल कंपनी ज्वाइन की। अभी मनोमय टेक्स इंडिया लिमिटेड के कॉर्पोरेट ऑफिस के साथ एचआर विभाग देख रही हैं। लढ़ा के नवाचार से मनोमय टेक्स ने सर्वाधिक एक्सपोर्ट उद्योग का अवार्ड हासिल कर लिया। पल्लवी ने बताया कि मनोमय शीघ्र ही यार्न उद्योग में कदम रखेगा।बाजार को बेहतर क्वालिटी की डेनिम दे सकेंगे। इस वर्ष लगभग 300 करोड़ का डेनिम फैब्रिक का निर्यात किया है। 500 से अधिक लोगों को रोजगार मिला है।
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अर्थव्यवस्था में अहम योगदान
एमएसएमई सेक्टर का भारत के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में अहम योगदान है। यह रोजगार के अधिकतम अवसर पैदा करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में अहम साबित हो रहा है। भीलवाड़ा जिले में 450 से 500 इकाइयां है। इनका वार्षिक टर्नओवर 1500 करोड़ रुपए है। इनमें लगभग 8 हजार महिलाएं कार्यरत हैं।
महेश हुरकुट, अध्यक्ष लद्यु उद्योग भारती भीलवाड़ा
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फैक्ट फाइल
450 से 500 एमएसएमई उद्योग
1500 करोड़ का टर्न ओवर
60 हजार से अधिक श्रमिक
8 हजार महिला श्रमिक
50 हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार
Published on:
01 Sept 2022 09:59 am
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