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ओला व अतिवृष्टि से प्रभावित किसान 1452, फसल बीमा महज 1347 का

प्राकृतिक आपदा में मदद के नाम पर किसानों के साथ इस बार बडा छल हुआ है। 70-80 प्रतिशत क्षति मानने वाले किसान और किसान संगठन सरकार से मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे रहे है और प्रशासन ने 20-30 प्रतिशत क्षति मानकर मुआवजे से हाथ खडे कर दिए।

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 पीएम फसल बीमा योजना, भिण्ड

ओला व अतिवृष्टि से प्रभावित फसल

भिण्ड. दूसरी ओर किसानों ने कम संख्या में फसल बीमा करवाया और उसमें भी दावा नहीं कर पाए। इस बार महज 30 किसानों ने फसल बीमा से क्षतिपूर्ति का दावा पेश किया है। यह दावा भी फसल कटाई प्रयोग के बाद पैमाने पर खरा उतरने की स्थिति में स्वीकृत किया जाएगा। ओला व अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों की संख्या जिले में एक हजार 452 है जबकि फसल बीमा महज 1347 किसानों ने करवाया है। इसमें भी प्राकृतिक आपदा से नुकसान की सूचना तय 72 घंटे की अवधि में केवल 30 किसानों ने दी है। इन किसानों को भी मुआवजा मिलना टेढी खीर होगा। क्योंकि पहले संबंधित पटवारी हल्के में संबंधित फसल का कटाई प्रयोग किया जाएगा। प्रयोग के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किसान को वास्तव में नुकसान कितना हुआ है। यह पूरे पटवारी हल्के पर नियम लागू होगा। यदि कोई किसान केवल अपनी फसल का दावा करता है तो उसका अलग से परीक्षण कराया जाएगा।

1350 हेक्टेयर प्राकृतिक आपदा से प्रभावित

जिले में प्रकृतिक आपदा से प्रभावित कृषि भूमि का रकवा प्रशासन ने एक हजार 350 हेक्टेयर माना है। जबकि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमित रकवा 19 हजार 223 हेक्टेयर है। इसके लिए किसानों ने 88 लाख 26 हजार 904 लाख रुपए बतौर प्रीमियम भी जमा करवाए हैं। बीमित रकवे का मूल्य 59.14 करोड रुपए से अधिक है। लेकिन किसान इसके बावजूद मुआवजा प्राप्त नहीं कर पाएंगे, क्योंकि ज्यादातर किसानों ने तय समय सीमा में इसकी सूचना संबंधित बैंक और बीमा प्रतिनिधि को नहीं दी है। केवल 30 किसानों ने सूचना दी है।

भारतीय किसान संघ ने दिया ज्ञापन

भारतीय किसान संघ के जिला मंत्री बृजेशबाबू चैधरी के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में किसानों ने कहा कि फसलों में नुकसान ज्यादा हुआ है जबकि प्रशासन ने केवल 20 प्रतिशत माना है। इससे न तो शासन की ओर से मुआवजा मिल पा रहा है और न ही बीज कंपनियों की ओर से कोई राहत मिल पाएगी। किसान संघ ने समर्थन मूल्य के खरीद केंद्र शुरू न होने का विषय भी उठाया। किसानों ने कहा कि जब तक खरीद केंद्र चालू न हों तब तक बाजार के भावों पर नियंत्रण किया जाए। ज्ञापन देने वालों में भारतीय किसान संघ के संभागीय उपाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह नरवरिया, जिला उपाध्यक्ष हाकिम सिंह यादव, संयोजक सोनू भदौरिया, बृजमोहन बौहरे कनेरा, रामपाल एवं दीनदयाल यादव शामिल रहे।

क्या है फसल कटाई प्रयोग

ज्हां किसान फसल बीमा के तहत मुआवजे का दावा प्रस्तुत करते हैं, वहां राजस्व व कृषि विभाग के दल फसलों के उत्पादन की जांच करते हैं। पांच साल के औसत के आधार पर पटवारी हल्का और कभी कभी व्यक्ति आधार पर उत्पादन का जो अंतर आता है, वही क्षति मानी जाती है। दोनों दलों का आकलन समान रहता है तो ठीक वरना दोनों के आकलन के औसत के आधार पर क्षतिपूर्ति की जाती है।

कहां कितने किसानों ने कराया बीमा

तहसील किसान रकवा किस्त बीमित राशि

गोहद 88897 11907.51 5427180 36.53करोड

अटेर 232 419.95 184798 1.2 करोड

भिण्ड 796 1235.98 571326 3.8 करोड

मेहगांव 2599 3453.29 1588178 10.58 करोड

लहार 711 1484.88 748985 4.99 करोड

रौन 412 721.45 306436 2.04 करोड

कथन-

किसान कम संख्या में फसल बीमा करवाते हैं, फिर समय पर क्लेम नहीं करते। इस बार 30 किसानों ने क्लेम किया है। फसल कटाई प्रयोग के आधार पर पांच साल के औसत के आधार पर मुआवजा तय होता है। वर्ष 2019-20 में करीब चार करोड रुपए की राशि मुआवजे में वितरित की थी।

पुष्पेंद्र सिंह, जिला प्रतिनिधि, पीएम फसल बीमा योजना, भिण्ड।

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