5 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

20 हजार की एक ट्रॉली लकड़ी, यूपी में बिकती है 50 हजार में

फूप. क्षेत्र में इन दिनों लकड़ी माफिया बड़ी संख्या में सक्रिय हैं। उसकी वजह यूपी में लकड़ी के दो गुना दाम मिलना है। यहां एक ट्रॉली लकड़ी की कीमत जहां

2 min read
Google source verification
trolley, sold, UP, wood, village,  bhind news, bhind news in hindi, mp news

फूप. क्षेत्र में इन दिनों लकड़ी माफिया बड़ी संख्या में सक्रिय हैं। उसकी वजह यूपी में लकड़ी के दो गुना दाम मिलना है। यहां एक ट्रॉली लकड़ी की कीमत जहां 20 हजार है वहीं यूपी में एक ट्रॉली लकड़ी की कीमत 50 से 60 हजार रुपए है। यहीं वजह है कि हाइवे-92 पर वन चौकी स्थापित होने के बाद भी रोज दर्जनों ट्राली लकड़ी वन तथा प्राइवेट भूमि से कट कर न सिर्फ आरामशीनों तक बल्कि प्रदेश की सीमा से बाहर हो रही है। वनविभाग की निष्क्रियता से लकड़ी माफिया कई चोर रास्ते भी खोल लिए हैं। अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि वन चौकी ने पिछले छह माह से कोई कार्रवाई नहीं की है।

माफिया दिन में वन भूमि पर खड़े पेड़ों को चिह्नित कर लेते हैं। रात होते ही लोडिंग शुरू हो जाती है। सुबह ५ बजे से पहले लकड़ी की ट्रालियां आरा मशीनों पर पहुंचना शुरू हो जाती है। कई आरामशीनों के लिए निकलने वाला रास्ता वन चौकी से होकर ही गुजरता है। फूप-सुरपुरा क्षेत्र की आधा दर्जन से अधिक आरामशीनों से कामर्शियल लकड़ी के गट्टे बनाकर कैंटरों से उप्र के आगरा, कानपुरा, लखनऊ तथा इटावा के लिए भेजी जा रही है। विंडवा, भदाकुर, भोनपुरा, सरायपुरा, ज्ञानपुरा, छंूछरी से कटने वाली लकड़ी हनुमंतपुरा होते हुए तथा बड़ेपुरा, रमा, कोषण, बिजौरा, चिलांैगा, गढ़ा, सपाड़, भगवासी, अहेंती, रानी विरगवां, मिर्चोली, चांचढ़ से कटने वाली लकड़ी निबुआ की चौकी से होकर इटावा तथा आगरा के लिए चली जाती है। सर्दी के मौसम में लकड़ी की डिमांड बढ़ जाने से अटेर वन क्षेत्र से प्रतिदिन ४० ट्रॉली लकड़ी का कटाव हो रहा है।

दो दर्जन ट्रॉलियां स्थानीय आरामशीनों तथा एक दर्जन से अधिक कैंटर-ट्रालियां उप्र की सीमा में जा रही हैं। वन अधिकारियों के द्वारा पेड़ काटने की अनुमति नहीं दी जा रही है जबकि आरामशीनों पर लकड़ी के ढेर अनदेखी की ओर इशारा कर रहे हैं। फूप क्षेत्र से लकड़ी की तस्करी का बड़ा कारण सीमा पार होते ही लकड़ी का भाव तीन गुना तक बढ़ जाता है। तस्करी के जुड़े लोगों का कहना है कि भिण्ड में एक ट्रॉली लकड़ी का भाव 20 हजार का है, जबकि उप्र में 50 से 60 हजार हो जाता है। इसी प्रकार जो टै्रक्टर ट्रॉली स्थानीय आरामशीनों पर १० हजार होती है, सीमा पार होते ही भाव 30 से 35 हजार तक पहुंंच जाता है। माफिया के निशाने पर बबूल,शीशम तथा नीम की लकड़ी है।

लकड़ी का परिवहन करते समय पकडऩे का प्रावधान नहीं हैं। इसके बाद भी वन क्षेत्रमें निगरानी बढ़ाई जाएगी। आरा मशीनों पर बबूल की लकड़ी आ रही है।

रमेश गोयल उपनिरीक्षक प्रभारी वन चौकी फूप


छुट्टी के दिन भी घर-घर जाकर किया लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरुक

अकोड़ा. नगर परिषद अकोड़ा सीएमओ सियाशरण यादव व उपयंत्री आकाश त्यागी ने अवकाश के दिन रविवार को वार्डों में घूमकर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरुक किया। इस दौरान लोगों को शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित किया गया।

नगर परिषद अधिकारियों को भ्रमण के दौरान वार्डवासियों ने वार्ड में व्याप्त अन्य समस्याओं से भी अवगत कराया। वहीं सीएमओ ने लोगों को शासन की योजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए लाभान्वित होने के लिए कहा। कस्बे में बंद पड़े हैंडपंपों का अवलोकन भी नपा अमले ने किया। इस दौरान महावीर सिंह यादव, अमर ङ्क्षसह यादव, नाहर सिंह, प्रकाश यादव रामहंस सिंह आदि लोगों ने पेयजल आदि समस्या का निराकरण कराए जाने के लिए आग्रह किया।