2 अप्रैल 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जिले में 14 लाख से ज्यादा कृषि भूमि खाते, ई केवाईसी हुई केवल तीन लाख की

आयुक्त भू-अभिलेख पोर्टल के 25 मार्च की स्थिति में जारी आंकड़ों मेंं भिण्ड जिले की स्थिति खराब है। जिले में कुल भूमि-स्वामी की संख्या 14 लाख 34 हजार 736 है, लेकिन ई-केवाईसी केवल तीन लाख आठ हजार 590 भूमि-स्वामियों की ही हो पाई है।

2 min read
Google source verification

भिंड

image

Vikash Tripathi

Apr 03, 2026

bhind news

भिण्ड. जिले में कृषि भूमि स्वामियों की संख्या 14 लाख से अधिक है, लेकिन ई-केवाईसी महज 22 प्रतिशत ही हो पाई है। राजस्व अमले को व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। किसान भी कई बार साइबर फ्रॉड के चक्कर में पटवारियों को वास्तविक जानकारी देने से कतराते हैं। जसके कारण आने वाले समय में किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ ईकेवाइसी होने पर ही मिल सकेगा।

आयुक्त भू-अभिलेख पोर्टल के 25 मार्च की स्थिति में जारी आंकड़ों मेंं भिण्ड जिले की स्थिति खराब है। जिले में कुल भूमि-स्वामी की संख्या 14 लाख 34 हजार 736 है, लेकिन ई-केवाईसी केवल तीन लाख आठ हजार 590 भूमि-स्वामियों की ही हो पाई है। जिले भर में 10 लाख 93 हजार 788 भूमि-स्वामी लंबित हैं। सरकार धीरे-धीरे कृषि भूमि से मिलने वाले लाभों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सभी योजनाएं लाने की कवायदेें कर रही हैं, इसलिए जानकारी अपडेट रखना आवश्यक होता जा रहा है, लेकिन साइबर ठगी के नित नए सामने आते मामलों से किसान सशंकित हैं। जिसके कारण वह अपनी जानकारी देने से कतरा रहे हैं। वहीं विभागीय अधिकारी किसानों को जागरुक नहीं कर रहे हैं जिसके कारण पूरा मामला अटका हुआ है।

करीब 3.5 लाख हेक्टेयर जमीन किसानों के पास

जिले में रबी सीजन के लिए किसानों के पास 3.50 लाख हेक्टेयर के करीब कृषि भूमि उपलब्ध होती है। 2.5 लाख हेक्टेयर के करीब जमीन खरीफ सीजन के लिए उपयोगी होती है। फल, सब्जी, फूल वाली खेती करने वाले किसानों की संख्या अलग है। जिले में 200 के करीब किसान प्राकृतिक खेती भी कर रहे हैं। कुछ व्यावहारिक समस्याएं तो ऐसी हैं कि जिनका समाधान किसान के उपलब्ध होने पर ही हो सकता है, जिसमें आधार से ङ्क्षलक मोबाइल नंबर प्रमुख है।

यूनिक आईडी की जानकारी नहीं

कृषि भूमि की अब यूनिक आईडी भी बन गई हैं, लेकिन इनकी जानकारी किसानों को नहीं है। जागरूक और गांव में ही रहने वाले किसान तो खसरा-खतौनी की नकल प्राप्त कर लेते हैं, लेकिन बाहर रहने वाले किसानों को इसकी जानकारी नहीं होती, जिससे भी व्यावहारिक समस्या आती है।

फैक्ट फाइल

1434736 कृषि भूमिस्वामी हैं जिले भर में।
1093788 कुल लंबित हैं ई-केवाईसी के मामले।
308590 की हो पाई है अब तक ई-केवाईसी।
254993 की स्वीकृति स्वयं के स्तर पर हुई है।
53597 की स्वीकृति समग्र आईडी के माध्यम से।
22129 स्वयं के स्तर पर लंबित हैं ई-केवायसी।
10206 समग्र आईडी स्तर पर लंबित हैं मामले।

कई बार डर लगता है कि ई-केवाईसी की ओटीपी के नाम पर फ्रॉड न हो जाए। वैसे यदि गांव में पूर्व घोषणा के आधार पर कैंप लगाकर ई-केवाईसी कराए जाए तो ज्यादा लाभ मिल सकता है।
राधेश्याम ङ्क्षसह, किसान
&किसान पटवारी के चक्कर में न रहें, स्वयं भी आधार से जुड़े नंबर से ई-केवाईसी कर सकते हैं। जब पटवारी के पास पेङ्क्षडग दिखेगी तो कलेक्टर हर सोमवार को समीक्षा करते हैं, हम उसे अपडेट करवा देंगे। किसान साइबर ठगी के चक्कर में ओटीपी देने से डरते हैं, जिससे पेडेंसी ज्यादा है।
नीरज मिश्रा, अधीक्षक, भू-अभिलेख, भिण्ड।