एमपी के भिंड की पूजा ओझा ने इतिहास रच दिया है। पूजा ने कयाकिंग केनोइंग में वर्ल्ड चेंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता है। यह वर्ल्ड चेंपियनशिप जर्मनी में चल रही है जिसमें पूजा ने 200 मीटर रेस में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीतकर नई उपलब्धि हासिल की।
एमपी के भिंड की पूजा ओझा ने इतिहास रच दिया है। पूजा ने कयाकिंग केनोइंग में वर्ल्ड चेंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता है। यह वर्ल्ड चेंपियनशिप जर्मनी में चल रही है जिसमें पूजा ने 200 मीटर रेस में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीतकर नई उपलब्धि हासिल की। दिव्यांग पूजा ओझा इससे पहले भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मेडल जीत चुकी है।
पूजा ओझा 19 अगस्त को भारतीय टीम के साथ जर्मनी के लिए रवाना हुई थी। यहां चल रही वर्ल्ड चेंपियनशिप में पूजा ने 200 मीटर रेस में भाग लिया और भारत के लिए सिल्वर मेडल जीतकर लिया। वे इस प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीतनेवाली पहली भारतीय बन गई हैं। उनकी इस उपलब्धि पर भारतीय टीम के सभी अन्य प्लेयर्स और कोच ने खुशी जताई।
कयाकिंग केनोइंग में पूजा लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहीं हैं। उन्होंने पिछली साल कनाडा में और उसके पहले थाइलेंड में भी सिल्वर मेडल जीता था। पूजा ओझा राष्ट्रीय स्तर पर भी कई मेडल जीत चुकी हैं। वे छह बार तो गोल्ड मैडल जीत चुकी हैं।
पूजा ओझा पैरों से 80 प्रतिशत दिव्यांग हैं। वे एक सप्ताह पहले ही जर्मनी के लिए रवाना हुई थीं और वहां जाकर अहम उपलब्धि हासिल कर ली। पूजा ने वर्ष 2017 में तत्कालीन कलेक्टर इलैयाराजा टी के सहयोग से इस खेल में अपना हुनर निखारा। कोच राधेगोपाल यादव से प्रशिक्षण लेना शुरू किया और इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। कयाकिंग केनोइंग की वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतनेवाली पूजा ओझा यह उपलब्धि हासिल करनेवाली भारत की पहली महिला खिलाड़ी बन गई हैं।
पूजा ने शहर के गौरी सरोवर से इस खेल की प्रेक्टिस की शुरूआत की थी। पहाड़ से हौसले रखने वाली दिव्यांग पूजा ने भोपाल में भी इसका प्रशिक्षण लिया।