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सरसों की फसल में लगा फफूंदी रोग, उत्पादन 50 प्रतिशत तक घटेगा, किसान चिंतित

किसान रबी की फसल को लेकर पहले से ही परेशान थे। अब सरसों की फसल में आए फफूंदी रोग ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। हाल ही में लगातार मौसम में परिवर्तन से अब किसानों के सामने नई चिंता पैदा हो गई है। इन दिनों खेतों में लहलहाती सरसों की फसल में फफूंदी रोग की शिकायतें आने लगी हैं। कई जगह तो खेतों में खड़े पौधे सूखने लगे हैं। इसके लिए किसान दवाइयों का भी उपयोग कर रहे हैं। लेकिन कई किसान अपने खेतों में इस रोग से 50 फीसदी तक नुकसान बता रहे हैं।

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भिंड

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Vishnu Tomar

Feb 24, 2023

Mildew disease in mustard crop, production will decrease by 50 percent

खेत में सरसों की फसल

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भिण्‍ड. किसान रबी की फसल को लेकर पहले से ही परेशान थे। अब सरसों की फसल में आए फफूंदी रोग ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। हाल ही में लगातार मौसम में परिवर्तन से अब किसानों के सामने नई चिंता पैदा हो गई है। इन दिनों खेतों में लहलहाती सरसों की फसल में फफूंदी रोग की शिकायतें आने लगी हैं। कई जगह तो खेतों में खड़े पौधे सूखने लगे हैं। इसके लिए किसान दवाइयों का भी उपयोग कर रहे हैं। लेकिन कई किसान अपने खेतों में इस रोग से 50 फीसदी तक नुकसान बता रहे हैं।

कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जिन किसानों ने बारिश से पहले सरसों की फसल की बार सिंचाई कर दी है। वहीं यह समस्या अधिक देखी जा सकती है। बीज उपचार के अभाव में यह रोग सरसों की फसल में जाता है। नमी के बाद बढ़ते तापमान एवं आर्द्रता के कारण यह रोग और अधिक बढ़ता है। मौसम में एक दम से अधिक नमी आने पर सरसों में तना गलन का रोग भी आने की संभावना अधिक रहती है। इसके बचाव के लिए किसानों को बुआई के समय ही विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। पिछले दस दिन से अचानक माैसम में गर्मी आने से सरसों की फसल उखड़ने लगी है।

फफूंदी रोग से ऐसे नष्ट होता है पौधा:

दौनियापुरा निवासी किसान चरनसिंह नरवरिया ने बताया फफूंदी रोग आने पर सरसों के पौधे पर लगे पत्तों के निचले हिस्सा में पीले धब्बे आते हैं। धीरे-धीरे यह धब्बे बढ़ते जाते हैं और पत्ते में छेद होने लगते है। इससे पत्तियां नष्ट होती है। उसके बाद पौधे को पोषण नहीं मिलने से पौधा सूख जाता है। जिले में इस साल 2.15 लाख हैक्‍टेयर में सरसों की फसल बोई है। लेकिन रोग लगने से उत्‍पादन में बेहद कमी आंकी जा रही है।

यह करें उपचार:

कृषि वैज्ञानिक अवधेश सिंह कुशवाह ने बताया कि सरसों में आए फफूंदी रोग से बचाव के लिए किसानों को डाइथिन एम 45 दो ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से एक हैक्टेयर में करीब 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। इसके साथ ही मोनोप्रोटो फॉस एक मिली लीटर एक लीटर पानी के हिसाब से प्रति हैक्टेयर के हिसाब से घेल बनाकर दवा का समय समय पर छिड़काव करने से इस रोग से छुटकारा मिल सकता है।

कथन:

किसान ईटीएल नामक रसायन का उपयोग फफूंदी रोग से फसल बचाने में कर सकते हैं। इस बार मौसम में लगातार बदलाव की वजह से यह रोग लगा है।

आरएस शर्मा, प्रभारी डीडीए, कृषि विभाग भिण्‍ड

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