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सरसों का उत्‍पादन 50 फीसदी तक घटा, किसान बोले-अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्र में प्रशासन ने सर्वे नहीं कराया, लागत भी निकलना मुश्किल

मौसम की मार अन्‍नदाताओं पर भारी पड़ रही है। पिछले साल के मुकाबले इस बार सरसों की फसल में 50 फीसदी तक उत्‍पादन घट गया है। 2.15 लाख हेक्‍टेयर भूमि के रकबा में बाई सरसों की फसल में जनवरी में फफूंदी रोग लगा, फिर ओलावृष्टि और बारिश ने फसल के विकास को प्रभावित किया। नतीजन खेतों में कतराई के दौरान किसान मायूस हो रहे हैं। थ्रेसर के नीचे पलड़ा में सरसों की उपज कम देख किसानों के पसीने छूट रहे हैं। ऐसे में गेहूं की फसल खेतों में लौट जाने से कृषिकों पर दौहरी मार पड़ी है।

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भिंड

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Vishnu Tomar

Mar 29, 2023

मौसम की मार झेल रहे किसान

सरसों की कतराई करते किसान

भिण्‍ड. मौसम की मार अन्‍नदाताओं पर भारी पड़ रही है। पिछले साल के मुकाबले इस बार सरसों की फसल में 50 फीसदी तक उत्‍पादन घट गया है। 2.15 लाख हेक्‍टेयर भूमि के रकबा में बाई सरसों की फसल में जनवरी में फफूंदी रोग लगा, फिर ओलावृष्टि और बारिश ने फसल के विकास को प्रभावित किया। नतीजन खेतों में कतराई के दौरान किसान मायूस हो रहे हैं। थ्रेसर के नीचे पलड़ा में सरसों की उपज कम देख किसानों के पसीने छूट रहे हैं। ऐसे में गेहूं की फसल खेतों में लौट जाने से कृषिकों पर दौहरी मार पड़ी है।

बता दें कृषि विभाग ने जिले में प्रति हेक्‍टेयर 20 क्विंटल सरसों के उत्‍पादन का आंकलन तय किया है, लेकिन मौसम की बेरुखी के कारण इस साल सरसों का उत्‍पादन 10 से 12 क्विंटल ही मिल रहा है। प्रशसन ने 2 लाख 15 हजार हेक्‍टेयर रकबा भूमि में 43 हजार क्विंटल के उत्‍पादन का अनुमान जारी किया है। मौसम में लगातार बदलाव से सर्दी अधिक होने के कारण पहले सरसों की फसल में फफूंदी रोग लग गया। किसान इससे उबर पाते, कि अतिवर्षा ने पानी फेर दिया। किसानों का कहना है कि प्रशासन ने सर्वे तक नहीं कराया है।

29 हजार हेक्‍टेयर अधिक भूमि में बुवाई:

प्राइवेट मंडी और बाजार में सरसों के भाव अधिक होने तथा ऑयल मील की मांग बढ़ने से किसानों ने पिछले साल की तुलना में इस बार 29 हजार हेक्टेयर में सरसों की बुवाई ज्यादा की है, लेकिन मौसम ने साथ नहीं दिया। जबकि पिछली साल सरसों का रकबा 1 लाख 86 हजार हेक्‍टेयर रखा गया था। तब 20 क्विंटल हेक्‍टेयर से उत्‍पादन हुआ था।

ऐसे बदला मौसम:

जनवरी में पाला पड़ने के साथ शीतलहर चली व बाद में फरवरी में अचानक गर्मी बढ़ने से सरसों की फसल नष्ट हो गई। विगत दिनों पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से जिले में अंधड़ के साथ बरसात व ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी। इस साल चना, मसूर और गेहूं की फसल का उत्‍पादन भी घटा है। प्रशासन ने जिले के 15 गांव को ओलावृष्टि प्रभावित माना है, जिनमें सर्वे कार्य चल रहा है।

कथन:

सरसों की फसल इस साल अच्‍छी थी, लेकिन लगातार मौसम बिगड़ने से उत्‍पादन पर फसल खरी नहीं उतरी है।

राकेश सिंह, किसान दौनियापुरा

कथन:

मैंने दस बीघा जमीन में सरसों की फसल बोई थी। प्रति बीघा 4 क्विंटल का उत्‍पादन आंका था, लेकिन 2 से ढाई क्विंटल सरसों निकल रही है।

दिलीप सिंह नरवरिया, किसान

कथन:

सरसों की फसल तो खराब हो ही गई, गेहूं भी खेतों में लौट गया है। प्रशासन का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी सर्वे करने नहीं आया है।

फेरनसिंह, किसान

कथन:

लगातार मौसम बदलाव से सरसों प्रभावित हुई है। प्रभावित इलाकों में सर्वे कराया जा रहा है। जहां नुकसान है, उन किसानों की भरपाई की जाएगी।

आरएस शर्मा, उप संचालक, कृषि विभाग भिण्‍ड

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