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नैनो से मिलेगी खारे पानी से निजात

डेढ़ साल पहले तीन गंावों में किया गया प्रयोग सफल, अन्य को भी जरूरत

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भिंड

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monu sahu

May 01, 2018

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भिण्ड. गोहद और मेहगंाव में खारे पानी की समस्या से जूझ रहे एक सैकड़ा से अधिक गांवों के लिए नैनो टैक्नोलॉजी वरदान साबित हो सकती है। गोहद के तीन गांवों में प्रयोग सफल होने के बाद अन्य गांवों के लिए भी तकनीकि का उपयोग करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। वर्तमान में मीठे पानी की तलाश में ग्रामीणों को दो-दो किमी का सफर तय करना पड़ रहा है। खारे-पानी की समस्या के चलते कई गांव आबादी विहीन हो गए हैं।

गोहद तथा मेहगांव विकासखंड के १०६ गांवों में खारे पानी की समस्या पिछले दसकों से समस्या बनी है। शासन की ओर से अब तक मीठे पानी की योजनाओं पर लाखों रुपए खर्च किए जा चुके हैं लेकिन समस्या जस की तस है। ग्रामीणों को पीने के लिए पानी मीलों दूर नलकूपों से ढोना पड़ता है। गर्मी के मौसम में पानी की खपत बढ़ जाने से पेयजल संकट नासूर का रूप धारण कर लेता है। ८० फीसदी से अधिक आर्थिक रूप से सक्षम परिवार गांवों से पलायन ही कर चुके हैं। खाने पानी की समस्या के निजात दिलाने के लिए चक बरथरा, फतेहपुर, गढरौली गांव के तीन हैंडपंपों में समर्सिबल पंप के साथ नैनो यंत्र लगाकर पूरे गांव क ो समस्या से निजात दिला दी गई है। सफलता के बाद अन्य १०३ गांवों में भी नैनो उपकरण लगाने के लिए कार्ययोजना तैैयार की गई थी जो वर्तमान में ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। खारे पानी की समस्या के चलते कई गंाव आबादी विहीन हो गए है। कुछ गंावों का पानी तो इतना खारा है कि इसका का उपयोग कपड़े धोने और नहानें में किया जाना भी संभव नहीं है। २००० से २४०० पीपीएम तक पानी खारा होने के कारण पीने योग्य नहीं हैं।

ये थी पीएचई की योजना

समस्या ग्रस्त गांव में मौजूद किसी एक हैंडपंप में समर्सिवल पंप डालकर उसमें यंत्र फिट कर दिया जाए। पंप के ऊपर ही एक प्लास्टिक की टंकी रखवाई जाए। बिजली आने पर टंकी को भर दिया जाए। स्टोर पानी की सप्लाई गांव में लाइनों के द्वारा की जाए। हैंडपंप में समर्सिबल डालकर उपकरण लगाने से एक हजार की आबादी को पानी पहुंचाया जा सकता है। जो बड़े गांव हैं वहां के दो हैंडपंपों में उपकरण लगाकर समस्या का समाधान संभव हैं।


नैनो यंत्र की कीमत ४ से ५ लाख तक, निजी बोरों में भी हो सकता है उपयोग

नैनो यंत्र लगाना महंगा होने के कारण प्राइवेट बोरों में इसका उपयोग नहीं हो पा रहा। एक हैंडपंप में ४ से ५ लाख रुपए खर्च करने पर हैंडपंपों तथा नलकूपों से निकलने वाले पानी का खारापन काफी हद तक काम हो जाता है। डेढ़ साल पहले पीएचईने योजना भी तैयार की थी लेकिन लागत अधिक आने के कारण ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

-गोहद के कई गांवों में पानी समुद्र से भी खारा है। पानी में २००० से २४०० पीपीएम तक खारापन है, जबकि नैनो टैक्नोलॉजी का जो यंत्र उपलब्ध कराया जा रहा है उसकी क्षमता ३०० पीपीएम कम करने की है। कुछ गंाव में जहां पर खारापन कम था वहां उपयोगी साबित हो रही है, लेकिन जहां पर खारापन ज्यादा हैं वहां पानी थोड़ा उपयोगी होने लगा है। पूर्ण रूप से कारगर न हो पाने के कारण इसकों आगे नहीं बढ़ाया जा रहा।

एससी नाग सहायक यंत्री पीएचई भिण्ड