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जैन तीर्थ स्थल गिरनारजी की पवित्रता बचाने समाज ने निकाली आक्रोश रैली, बाजार बंद कराया

गुजरात प्रांत के जूनागढ़ में स्थित जैन समाज के पवित्र तीर्थस्थल गिरनारजी को अपवित्र कर पहचान मिटाने और कब्जा करने की कोशिशों के विरोध में सकल जैन समाज रविवार को सडक़ों पर उतरा। सुबह से दोपहर एक बजे तक बाजार बंद रहे, रैली निकालकर प्रदर्शन किए और धनवंतरि कॉम्प्लेक्स में मुनि विनय सागर महाराज के सानिध्य में धरना-प्रदर्शन आंदोलन भी किया।

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गिरनारजी की पवित्रता बचानेआक्रोश रैली

धनवंतरि कॉम्प्लेक्स में मुनि के सानिध्य में धरना देते लोग।

भिण्ड. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नाम सांसद संध्या राय के माध्यम से ज्ञापन भी दिया गया। जैन समाज के ने कहा कि उनके 22वीं तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ ने गिरनार पर्वत की पांचवीं टोंक से मोक्ष प्राप्त किया था। भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न कुमार ने गिरनार पहाड़ी की चौथी टोंक, शंभु कुमार ने तीसरी और भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध कुमार ने दूसरी टोंक से मोक्ष प्राप्त किया था। जूनागढ़ की राजकुमारी राजुल ने भी नेमिकुमार से दीक्षा लेने के बाद गिरनार पर्वत की प्रथम टोंक पर घनघोर तप किया था। इसी पर्वत से 72 करोड़ 700 सैन साुधओंं के भी मोक्ष प्राप्त करने का उल्लेख जैन शास्त्रों में है। इसलिए गिरनार पर्वत सर्वोच्च जैन तीर्थ सम्मेद शिखर के समान ही पूजनीय तीर्थ स्थल है। पर्वत की पांचवीं टोंक (भगवान नेमिनाथ की मोक्षस्थली) पर पाषाण में भगवान नेमिनाथ के चरण चिह्न एवं प्रतिमा उत्कीर्ण है। इसकी पुष्टि गुजरात सरकार द्वारा 1964 में प्रकाशित एक वीडियो से भी होती है। लेकिन इसी पांचवीं टोंक को गुरु दत्तात्रेय शिखर, चौथे टोंक को औघडऩाथ शिखर, तीसरे टोंक को गुरु गोरखनाथ शिखर नाम से वर्णित किया गया है। जबकि जैन तीर्थंकर नेमिनाथ, प्रद्युम्न कुमार, शंभु कुमार, अनिरुद्ध कुमार और राजुलमती का कहीं भी उल्लेख नहीं है। जिनका उल्लेख किया गया हैउनका ऐतिहासिक रूप से इन टोंकों से कोई संबंध नहीं है। गिरनार के प्राचीन शिलालेखों में भी कहीं वर्णन नहीं है।
पूजा-अर्चना में किया जा रहा व्यवधान
ज्ञापन में जैन समाज ने कहा कि वर्ष 2004 से जैन समाज के लोगों को दर्शन और पूजा-अर्चना में व्यवधान डाला जा रहा है। पांचवीं टोंक के अंदर प्रवेश करने वाले जैन तीर्थ यात्रियों को रोका जा रहा है, उनके साथ अभद्रता की जा रही है, अपशब्द कहे जा रहे हैं। यही नहीं एक जनवरी 2013 को महंत मुक्तानंद गिरि ने जैन मुनि प्रबल सागर पर प्राणघातक हमला किया था, जिसका आपराधिक प्रकरण भी दर्ज हुआ था। हालांकि बाद में उनकी मृत्यु पर मामला खत्म कर दिया गया था। संरक्षित स्मारक के चरित्र को भी बदल दिया गया है। इससे जैन समाज में तीव्र आक्रोश है। न्यालयीन व्यवस्था और उसके बाद भी एक अक्टूबर 2023 को जैन यात्रियों पर धारदार हथियारों से हमला किया गया और दुव्र्यवहार किया गया। इसके विरोध में जैन समाज ने तीर्थ बचओ, धर्मबचओ रैली निकाली और जैन तीर्थस्थल की मूल भावना को बरकरार रखने की मांग की।
यह रहे आंदोलन में शामिल
प्रदीप जैन गुड्डा, जितेंद्र जैन बॉबी, गुरुसेवा संघ, प्रमोद जैन डब्बू, एडवोकेट दिनेश जैन, डॉ. एसके जैन, डॉ. अनिल जैन, स्नेहलता जैन, संगीता पवैया, आभा जैन अध्यक्ष भाजपा महिला मोर्चा, रेखा जैन, नीतू जैन पहाडिय़ा, दीपचंद जैन शिक्षक, देवेंद्र जैन गौरई, अमित जैन किला रोड, धर्मेंद्र जैन पत्तल वाले, विवेक मोदी, आकाश मोदी, धर्मेद्र जैन पोस्ट ऑफिस, आंदोलन में शामिल रहे।

यह मांगें रखीं ज्ञापन के माध्यम से
-गिरनार पर्वत पर 15 अगस्त 1947 की स्थिति को बहाल किया जाए।
-जैन धर्मानुयाइयों को जैन धर्म के अनुसार पूजा, अभिषेक एवं प्रसाद सामग्री चढ़ाने की अनुमति दी जाए।
-पांचवीं टोंक पर पाषाण में उत्कीर्ण नेमिनाथ की पद्मासन प्रतिमा सार्वजनिक कर स्थान पर भगवान नेमिनाथ लिखा जाए।
-जैन पुजारी को बैठने की अनुमति दी जाए।
-जैन शास्त्रों के अनुसार सभी टोंक का नामकरण किया जाए।
-पांचवीं टोंक सहित पूरे पर्वत पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।
-गुजरात उच्च न्यायालय के 17 फरवरी 2005 के आदेश का पालन किया जाए।
-गुजरात में जैन कल्याण बोर्ड का गठन किया जाए।
-7 अक्टूबर को पीसी व 28 अक्टूबर को सार्वजनिक सभा में पूर्व सांसद महेश गिरि द्वारा जैन धर्म व संतों के खिलाफ बोली गई भाषा पर सख्त कार्रवाई की जाए।