
बंगला बाजार की सडक़ों पर जल भराव।
रवींद्र सिंह कुशवाह, भिण्ड. नगरपालिका क्षेत्र में 50 हजार से अधिक मकान बने हैं और अधिकांश में वाटर हार्वेस्टिंग का इंतजाम नहीं है। ऐसे में बरसात के दिनों में इन भवनों की छतों का पानी बेकार नालियों में बह जाता है। जबकि इसे सहेजकर न केवल भूजल स्तर को समृद्ध किया जा सकता है बल्कि जल भराव से निर्मित होने वाली व्यावहारिक समस्याओं को भी कम किया जा सकता है।
सुरक्षा निधि भी हो जाती है वापस
वाटर हार्वेस्टिंग का इंतजाम करने के लिए नगरपालिका भवन निर्माण की अनुमति के साथ 10 हजार रुपए बतौर सुरक्षा निधि जमा करवाती है। भवन स्वामी वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था कर उसका प्रमाण पत्र एवं भौतिक रूप से सत्यापन करवा देता है तो यह राशि उसे वापस कर दी जाती है। इसके बावजूद वाटर हार्वेस्टिंग के लिए लोग गंभीर नहीं हैं। नगरपालिका ने भी कभी इसके लिए जांच अभियान या अन्य कोई कवायद नहीं की।
150 घरों में भी नहीं वाटर हार्वेस्टिंग
नगरीय क्षेत्र में 140 वर्गमीटर या इससे अधिक क्षेत्रफल वाले निर्मित भवनों की संख्या 20 हजार से अधिक होगी, लेकिन मुश्किल से 150 लोगों ने भी वाटर हार्वेस्टिंग नहीं करवाई है। राजनीतिक हस्तक्षेप एवं सांठगांठ से भवन निर्माण की अनुमतियां ही लोग नहीं लेते, इसलिए वाटर हार्वेस्टिंग भी नहीं हो पाती है।
फैक्ट फाइल
50 हजार से अधिक मकान हैं नपा क्षेत्र में।
140 वर्गमीटर या इससे अधिक के भवन में वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य।
20 हजार भवन और व्यावसायिक परिसर पात्रता के दायरे में।
150 लोगों के पास भी नहीं है वाटर हार्वेस्टिंग का इंतजाम।
15 दिन में मिल जाती है निर्माण की अनुमति नपा से।
कथन-
यहां भवन निर्माण की अनुमति ही लोग बहुत कम लेते हैं। वाटर हार्वेस्टिंग 140 वर्गमीटर या इससे अधिक के भवन निर्माण में अनिवार्य है। कुल लोगों ने अनुमति लेकर बनवाए हैं, लेकिन यह संख्या 150 से ज्यादा नहीं होगी। इस दिशा में प्रयास तेज करेंगे।
विकास मेहतो, इंजीनियर निर्माण शाखा, नपा, भिण्ड।
Updated on:
21 Jun 2023 09:00 pm
Published on:
21 Jun 2023 08:59 pm
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