
सत्संग कराते संतजन
भिण्ड. महात्मा ने कहा कि जब प्रभु और संतों की कृपा होती है, तब सत्संग होता है। सत्संग का शब्दिक अर्थ ही सत्य के साथ मिलन होना है। जो पहली भक्ति है उसे भगवान नवधा भक्ति कहते हैं। संतों का सानिध्य ही पहली भक्ति है। संतों की प्राप्ति, वार्तालाप, ज्ञान के बारे में चर्चा, ज्ञान के बारे में जिज्ञासा भी इसका साधन है। आध्यात्मिक तत्व की प्राप्ति की जिज्ञासा ही भक्ति है। जिस प्रकार रेगिस्तान में व्यक्ति जाता है तब उसे प्यास लगने पर केवल एक ही चिंता सताती है कि पानी कैसे मिलेगा ? चारों तरफ फिरता है और सोचता है कि कोई व्यक्ति मिले जिससे कुआं-बावड़ी के बारे में जानकारी प्राप्त करें। तब उसे कोई खजाना छोडऩा पड़े तो छोड़ देगा, लेकिन पानी उसकी प्राथमिकता होगी। ऐसी ही जिज्ञासा भगवान को प्राप्त करने की होनी चाहिए। जब यह जिज्ञासा होती है तब संतों की तलाश होती है और संत मिलन पर भगवान प्राप्ति का मार्ग मिलता है।
मनुष्य को ही कथा सुनने का सौभाग्य मिलता है
साध्वी अंबालिका बाई ने कहा कि मनुष्य को ही बैठकर कथा श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त है। पशु, पक्षियों को यह सौभाग्य नहीं मिलता। मनुष्य का शरीर मिलना पिछले जन्म के अच्छे कर्मों का फल है। मनुष्य होने से ही आपको साधु-संतों का सानिध्य प्राप्त हुआ। मनुष्य रूप में जन्म के लिए जीवन तरसते हैं, लेकिन जब मनुष्य शरीर प्राप्त हो जाता है तो फिर सांसारिक जीवन में भटकना पड़ता है। मनुष्य जीवन में लोग ज्ञान को प्राप्त करके अपने जीवन का उद्धार करेंगे और परम पद को प्राप्त कर सकते हैं। महात्मा ईश्वरता बाईजी, सुमना बाईजी, ललिता बाईजी, साध्वी कल्पना बाई, साध्वी सारिकाबाई मंचासीन रहीं।
आज निकाली जाएगी आध्यात्मिकता जागरूकता रैली
कथा में सत्संग करते हुए महात्मा अंबालिका बाई ने बताया कि 27 फरवरी को हंस आश्राम भारौली रोड तिराहे से आध्यामिकता जागरूकता यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा भारौली रोड तिराहे से बस स्टैंड होते हुए परेड चौराहा, गांधी मार्केट, किला रोड एवं लहार रोड चौराहा होते हुए आश्रम पहुंचेगी।
Published on:
26 Feb 2023 09:23 pm
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