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किसानों का दर्द : सिर्फ दो घंटे के लिए खुल रही सब्जी मंडी, नष्ट करना पड़ रहा माल

लॉकडाउन के चलते बाहर नहीं ले जा पा रहे फसल, आवारा पशुओं की रखवाली बड़ी समस्या, नहीं मिल रहे उचित दाम

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भिंड

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Hussain Ali

Apr 24, 2020

किसानों का दर्द : सिर्फ दो घंटे के लिए खुल रही सब्जी मंडी, नष्ट करना पड़ रहा माल

किसानों का दर्द : सिर्फ दो घंटे के लिए खुल रही सब्जी मंडी, नष्ट करना पड़ रहा माल

भिण्ड. लॉकडाउन की मार एक ओर जहां आम किसानों पर पड़ रही है, वहीं सब्जी उत्पादन करने वाले छोटे किसान भी बर्बादी की कगार पर हैं। सब्जी की फसल तैयार करने में प्रति बीघा 10-15 हजार का खर्चा आने के बाद भी उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। किसानों ने फसल को नष्ट करना ही शुरू कर दिया है।

परंपरागत खेती से हटकर शहर की 20 किमी की परिधि में आने वाले 1500 से अधिक किसानों ने मुनाफा कमाने के लिए 800 बीघा के रकबा में बंदगोभी, धनिया, मिर्च, टमाटर, भिण्डी और खीरा की फसल बोई थी। जैसे ही फसल आनी शुरू हुई वैसे ही लॉकडाउन शुरू हो गया। 25 दिनों से भिण्ड सब्जी मंडी सुबह 5 से 7 बजे दो घंटे के लिए खुल रही है। इसी अवधि में थोक व्यापारियों को किसानों से सब्जी खरीदना होती है। जरा सी भी देरी होने पर पुलिस किसानों पर लाठियां बरसा देती है। पुलिस के डर से 80 फीसदी किसान फसल लेकर नहीं आ रहे हैं। लोडिंग वाहन भी आसानी से सब्जी मंडी आने को तैयार नहीं हो रहे, जो तैयार हो रहे हैं वे मनमाना किराया मंाग रहे हैं। २४ घंटे आवारा पशुओं से फसल की रखवाली भी किसानों पर भारी पड़ रही है। उधर, फसल बचाने के लिए हर सप्ताह सिंचाई भी करना पड़ रही है। इसमें प्रतिबीघा पर 500 रुपए तक का खर्च आ रहा है।

थोक व्यापारी-हॉकर्स उठा रहे हैं लाभ

एक ओर सब्जी उत्पादक किसानों को उचित दाम नहीं मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आम आदमी को भी इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसान और आम आदमी की मजबूरी का फायदा थोक कारोबारी और हॉकर्स उठा रहे हैं। बंदगोभी का थोक भाव 8 से 10 रुपए किग्रा है, जबकि हॉकर्स 20 से 25 किग्रा की दर से बेच रहे हैं। मिर्च किसानों से 15 से 20 रुपए किग्रा की दर से खरीदी जा रही है, जबकि हॉकर्स 50 रुपए किग्रा बेच रहे हैं। इसी प्रकार लौकी किसानों से 7 से 10 रुपए किग्रा खरीदी जा रही है, हॉकर्स 25 से २6 रुपए प्रति किग्रा बेच रहे हैं। धनिया 15 रुपए प्रति किग्रा खरीदा जा रहा है, जबकि शहर में 50 रुपए किग्रा बेचा जा रहा है।

पूर्व में जब मंडी पूरे दिन तक खुलती थी तब खपत भी ज्यादा थी। अब 40 फीसदी तक कम हो गई है। घोष विक्रय नहीं हो पा रहा है। जिस थोक व्यापारी को जितनी आवश्यकता होती है उतनी ही खरीदता है, क्योंकि बच गई तो उसका करेंगे क्या।
मो. सलीम खां, थोक सब्जी विक्रेता

प्रतिदिन 150 से अधिक किसान सब्जी लेकर पहुंचते हंै। दो घंटे में ५० की खरीद हो पाती है। मजबूरी में किसानों को औने पौने भाव में सब्जी देना पड़ती है।
शंभू दयाल शर्मा, किसान, दबोहा