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निजी स्वार्थ में भिवाड़ी नहीं बन सका जिला, तिजारा का राजनीतिक नेतृत्व कमजोर

पूर्व सभापति ने धरना देकर भिवाड़ी को जिला नहीं बनाए जाने का ठीकरा विधायक पर फोड़ा

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निजी स्वार्थ में भिवाड़ी नहीं बन सका जिला, तिजारा का राजनीतिक नेतृत्व कमजोर

निजी स्वार्थ में भिवाड़ी नहीं बन सका जिला, तिजारा का राजनीतिक नेतृत्व कमजोर


भिवाड़ी. औद्योगिक नगरी भिवाड़ी को जिला नहीं बनाए जाने पर विरोध प्रदर्शन का दौर शुरू हो गया है। सोमवार को पूर्व सभापति एवं जिला महामंत्री अलवर उत्तर संदीप दायमा के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ता, सामाजिक और व्यापारिक संगठन के सदस्यों ने एडीएम कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। पूर्व सभापति ने इस मौके पर तिजारा क्षेत्र की राजनीतिक कमजोरी का मुद्दा उठाया। कहा कि विधायक अब कह रहे हैं कि हम पता नहीं चला। जब विधायक सरकार के साथ होटलों में महीनों ठहरे हुए थे। राज्यसभा चुनाव सहित अन्य अवसरों पर बड़ी डील कर रहे थे। तब उन्होंने सरकार को भिवाड़ी जिला बनाने का प्रस्ताव क्यों नहीं रखा। विधायक ने दो नाव की सवारी की जिसमें उन्हें डूबना ही था। विधायक को जब भी मौका मिला उसका लाभ उठाया। विधायक ने अपने निजी हित को साधा। भिवाड़ी-तिजारा-टपूकड़ा में जिला बनने की सभी प्राथमिकताएं थीं, इसके बावजूद इस जगह को छोडक़र दूदू और खैरथल जैसी ग्राम पंचायतों को जिला बनाना राजनीतिक नेतृत्व की कमजोरी है। विधायक ने कलगांव में जिला बनाने का जो प्रस्ताव भेजा, उसके आसपास खुद का फार्म हाउस है। सीएम को यह पता था, इसलिए उन्होंने खैरथल को जिला घोषित कर दिया। में भिवाड़ी-तिजारा को जिला बनाने की हरसंभव कोशिश करूंगा, भाजपा सरकार आने पर भिवाड़ी-तिजारा जरूर जिला बनेगा। भिवाड़ी में अभी तक जो भी कार्यालय आए उसमें विधायक का कोई योगदान नहीं है। थानागाजी गैंगरेप के बाद सरकार ने अपनी नाकामी छिपाने यहां पर एसपी ऑफिस खोला, क्योंकि एनसीआर और औद्योगिक क्षेत्र होने की वजह से भिवाड़ी में अपराध का ग्राफ अधिक था। विधायक बार-बार ७५ बनाम चार साल विकास का नारा लगा रहे थे, जिला नहीं बनने पर उसकी पोल खुल गई है। प्रदर्शन में शामिल वक्ताओं ने कहा कि भिवाड़ी से खैरथल की कोई कनेक्टिविटी नहीं है। भिवाड़ी में छह हजार औद्योगिक इकाई और आठ लाख की आबादी निवास करती है। सरकार को सबसे अधिक राजस्व मिलता है। इन सब दृष्टिकोण से जिला घोषणा में भिवाड़ी की उपेक्षा न्यायोचित नहीं है। धरने में चित्रा शर्मा, पवन चौहान, सुबे ङ्क्षसह, नरेंद्र खटाना, प्रवीण यादव, सुरेश त्यागी, अयूब खान, उदयनारायण तिवारी, सुनील तायल, महेंद्र मंगला, बने गुर्जर, आनंद अग्रवाल, कंचन तिवारी, भीम विधूड़ी, इंदर, देवेंद्र यादव, रूपचंद, दीपक यादव, जगदीश ङ्क्षसह, मोहनलाल, वीरपाल, वीरेंद्र तंवर, संतराम दायमा, बिल्लू राठी, असरूद्दीन खान, सतनाम, चुन्नीराम और धीरज शर्मा सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता शामिल रहे।
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बाबा मोहनराम के दरबार में दिया ज्ञापन
धरना प्रदर्शन करने के बाद भाजपा कार्यकर्ता एडीएम डॉ. गुंजन सोनी को ज्ञापन देने पहुंचे। भाजपा कार्यकर्ताओं ने मांग रखी कि एडीएम ज्ञापन लेने आएं। एक प्रतिनिधिमंडल एडीएम से मिलने गया और चैंबर से बाहर आकर ज्ञापन लेने की मांग रखी। एडीएम ने कहा कि पांच लोगों का प्रतिनिधिमंडल चैंबर में अंदर आकर ज्ञापन दे सकता है। इस पर आक्रोशित भाजपा कार्यकर्ता चैंबर के बाहर ही धरने पर बैठ गए। अधिकारियों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होने संबंधी आरोप लगाए और जमकर नारेबाजी की। कुछ देर बाद मिलकपुर स्थित बाबा मोहनराम मंदिर के दर पर ज्ञापन सौंपा।
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बार एसोसिएशन ने भी सौंपा ज्ञापन
भिवाड़ी बार एसोसिएशन ने भी भिवाड़ी को जिला बनाए जाने की मांग रखी और सीएम के नाम एडीएम को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन देने वालों में अध्यक्ष पूर्ण ङ्क्षसह यादव, मुकेश विधूड़ी, मुनफीद खान, ललित यादव, मधु यादव, देवेंद्र तंवर, अली शेर, नरेश कुमार, सय्यार खान, पदम यादव, यशवीर सहित अन्य अधिवक्ता शामिल रहे।