
भिवाड़ी प्रसारण का बिजली तंत्र ओवरलोड, बढ़ रही कटौती और ट्रिपिंग
धर्मेंद्र दीक्षित
भिवाड़ी. औद्योगिक क्षेत्र में प्रसारण निगम का बिजली तंत्र ओवरलोड चल रहा है। अधिक भार होने की वजह से बार-बार कटौती और ट्रिपिंग हो रही है। उद्यमियों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है और निगम को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है। बिजली की आपूर्ति निर्बाध होने पर निगम को महीने में करोड़ों रुपए का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है। वहीं उद्यमियों की समस्या का भी समाधान हो सकता है।
भिवाड़ी में बिलाहेड़ी 220 केवी जीएसएस से बिजली आपूर्ति होती है। इसकी क्षमता 360 एमवीए की है। इसमें तीन पावर ट्रांसफार्मर हैं, दो सौ एमवीए (मेगा वॉल्ट एंपीयर) और एक 160 एमवीए का है। यहां से भिवाड़ी, कहरानी, चौपानकी औद्योगिक, व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्र में बिजली आपूर्ति होती है। औद्योगिक क्षेत्र में नई इकाई के आने की वजह से और पुरानी इकाइयों द्वारा स्वीकृत भार में वृद्धि कराने की वजह से उक्त जीएसएस से क्षमता का शत प्रतिशत विद्युत प्रवाह किया जा रहा है। अभी इस जीएसएस से शत प्रतिशत भार लिया जा रहा है, जबकि नियमानुसार क्षमता का 90 प्रतिशत लोड ही जीएसएस पर डाल सकते हैं। ओवरलोड होने की वजह से कहीं न कहीं की आपूर्ति बाधित करनी पड़ती है, जिससे बार बार बिजली कटौती होती है।
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क्रमोन्नत होने से दूर होगी समस्या
ओवरलोड को कम करने के लिए 132 केवी जीएसएस चौपानकी को क्रमोन्नत कर 220 केवी जीएसएस बनाया जाना विकल्प हो सकता है। इसके बाद बिलाहेड़ी जीएसएस से सिर्फ भिवाड़ी और कहरानी औद्योगिक क्षेत्र की आपूर्ति रह जाएगी। चौपानकी से चौपानकी पथरेड़ी और आसपास के गांव में आपूर्ति हो जाएगी। 132 को 220 केवी में क्रमोन्नत करने में करीब पांच करोड़ की लागत आएगी।
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आय बढ़े, लागत घटे
विद्युत निगम भिवाड़ी उपखंड द्वारा प्रति महीने 210 करोड़ का राजस्व दिया जाता है। यहां पर 45 हजार औद्योगिक, वाणिज्यिक और आवासीय उपभोक्ता हैं। बार-बार बिजली कटौती होने की वजह से उद्यमियों को जनरेटर चलाकर उत्पादन जारी रखना पड़ता है। जिससे उद्यमियों की लागत बढ़ जाती है। अगर निर्बाध आपूर्ति हो तो निगम को प्रति महीने करोड़ों की अतिरिक्त आय बढ़ सकती है।
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उद्यमी भी जता रहे विरोध
वायु गुणवत्ता आयोग एक अक्टूबर से डीजी सेट में किट नहीं लगाने पर बंद करने के आदेश जारी कर चुका है। उद्यमियों का कहना है कि किट बाजार में उपलब्ध नहीं है। जो मिल रही है वह काफी महंगी है। आयोग की गाइडलाइन के अनुसार नए डीजी सेट भी काफी महंगे हैं। इसके साथ ही पुराने डीजी सेट लगाने में लाखों करोड़ों रुपए लगाए थे, जो कि अब व्यर्थ हो जाएंगे। उद्यमी आयोग से भी मांग कर चुके हैं कि निर्बाध बिजली दी जाए जिससे कि उन्हें डीजी की जरूरत नहीं पड़े। बिजली कटौती पर निगम पर जुर्माना लगाया जाए।
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जले हुए ट्रांसफार्मर की जगह नया रखा गया है, अगर इसके बावजूद वितरण में कटौती या ट्रिपिंग की समस्या है तो इसका भी समाधान किया जाएगा।
केके मीणा, मुख्य अभियंता, प्रसारण निगम
Published on:
25 Sept 2023 07:15 pm
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