
बड़ी लापरवाही : पालना गृह में छोड़ भी दें बच्चा, तो नहीं कोई नहीं है संभालने वाला, कोई भी उठा ले जाए बच्चा
अलवर. फेंको नहीं, हमें दें। बिना पहचान बताए पालने में छोड़ जाएं। अनचाहे नवजात शिशु का सुरक्षित भविष्य। जनाना अस्पताल परिसर में पालना गृह के बाहर मोटे-मोटे अक्षरों में लिखी ये लाइनें पढऩे में बड़ी ही हृदयस्पर्शी हैं, लेकिन सरकारी हालात और हकीकत इससे कोसों दूर है। यदि पालना गृह में बच्चा छोड़ भी दें तो उसे संभालने वाला कोई नहीं। पत्रिका टीम ने पालना गृह पर स्टिंग ऑपरेशन किया तो ये हकीकत सामने आई।
पालना में बैग रखा, 30 मिनट तक हलचल नहीं
पत्रिका टीम जनाना अस्पताल पहुंची। टीम ने पालना गृह के अंदर जाकर पालना करीब 5-6 किलो वजनी बैग रखा। पत्रिका टीम करीब 30 मिनट तक वहीं खड़ी रही और बैग पालना में रखा रहा, लेकिन अस्पताल का कोई भी कर्मचारी उसे देखने तक नहीं आया।
कोई बच्चा उठा ले गया हो तो!
स्टाफ से मिली जानकारी के अनुसार पालना गृह में वर्ष-2016 में दो नवजात बालिकाएं छोड़ी गई थी। इसके बाद से पालना गृह में कोई बच्चा नहीं आया। यदि कोई बच्चा पालना गृह में छोड़ा भी गया होगा तो पालना गृह की घंटी खराब होने के कारण स्टाफ को पता नहीं लग पाया होगा। ऐसे में इस बात से भी इंकार नहीं किया जाता कि कहीं कोई व्यक्ति ही बच्चा पालना गृह से बच्चा उठा ले गया हो।
2 मिनट बाद बजती है घंटी
व्यवस्थानुसार पालना गृह में जब भी कोई व्यक्ति नवजात शिशु को छोडकऱ जाएगा तो उसके रखने के दो मिनट बाद अस्पताल स्टाफ रूम में घंटी बजेगी। इससे ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ को यह पता लग जाएगा कि पालना गृह में कोई बच्चा छोडकऱ गया है। अस्पताल का स्टाफ तुरंत जाकर बच्चे को संभाल लेगा। लेकिन पत्रिका टीम के बैग रखने के बाद कोई घंटी ही नहीं बजी और न ही कोई स्टाफ वहां आया। अस्पताल के अंदर जाकर देखा तो पालना गृह के दरवाजे पर ताला लगा हुआ था।
वर्ष-2016 में शुरू हुआ पालना गृह
अनचाहे शिशुओं को लोग नालों व झाडिय़ों आदि में फेंक जाते हैं। ऐसे शिशुओं के सुरक्षित जीवन के उद्देश्य से सरकार ने पालना गृह योजना शुरू की। जिसके तहत जनाना अस्पताल परिसर में 17 अगस्त 2016 को पालना गृह स्थापित किया गया। जिसके बाद से पालना गृह में अब तक दो नवजात शिशुओं को छोड़ा गया है।
Published on:
24 Apr 2019 06:23 pm
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