
तिजारा. क्षेत्र के एक खेत में लहलहाती सरसों की फसल।
भिवाड़ी. धरती जब धानी चुनर ओढ़ ले, तब मौसम सुहाना लगने लगता है और बसंत ऋतु आने के संकेत भी होने लग जाते है। ऐसा ही अहसास क्षेत्र के खेतों में खिले सरसों के पीले फूलों को देखकर होने लगा है। क्षेत्र में सरसों की फसल लहलहा रही है। किसानों के लिए ये फूल खुशहाली लेकर आए हैं। जैसे खेतों में फूल खिल रहे हैं, वैसे ही किसान परिवारों के चेहरों पर मुस्कराहट उभरी हुई है। किसानों को इस बार बंपर पैदावार की उम्मीद है। जिधर देखो, वहां पीले फूलों से आच्छादित धरा नजर आती है। यह नजारा हर किसी का मन मोह रहे हैं। क्षेत्र के किसानों को सरसों से इस बार बहुत आस है।
क्षेत्र में काला सोना के नाम से कहीं जाने वाली सरसों के लिए अभी तक सर्दी और मौसम अनुकूल है। जिसके कारण ऊपज काफी अच्छी होगी। क्षेत्र के अधिकतर भागों में सरसों की पैदावार को लेकर किसान उत्साहित है। कई जगह अगेती सरसों के कारण उसमें फूल लग गए है। कृषि अधिकारियों के अनुसार क्षेत्र में इस बार 14 हजार 570 हैक्टेयर में सरसों की बुआई की है। इसके अलावा 9 हजार 608 हैक्टेयर में गेहूं तथा 110 हैक्टेयर में जौ की बुआई की गई है। यह गत साल के समान ही है। सहायक कृषि अधिकारी अजयसिंह का कहना है कि क्षेत्र में इस बार गत वर्ष की तुलना में सरसों और गेहूं की फसल की पैदावार अच्छी होने की उम्मीद है। अभी तक मौसम भी इसके अनुकूल है।
गेहूं की फसल हो रही जवां
धारूहेड़ा. कुछ दिनों से मौसम परिवर्तनशील बना हुआ है। रात में कडक़ सर्दी पड़ रही है। दिन में पड़ रही धूप भी सुहानी लगने लगी है। इस बार दिसंबर में मौसम शुष्क और साफ बना हुआ है। हालांकि तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। जिससे अधिकतम तापमान 24.5 डिग्री सेल्सियस से न्यूनतम तापमान 9.8 डिग्री तक बना हुआ है। दिन-रात के तापमान में लगभग 15.7 डिग्री का अंतर बना हुआ है। गत वर्ष दिसंबर में अधिकतम तापमान 19.5 डिग्री था। जिससे दिन में भी ठिठुरन अधिक बढ़ गई थी। इस वर्ष अब तक तापमान 20 डिग्री तक भी नहीं पहुंचा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार तापमान में ज्यादा अंतर फसलों के लिए उपयुक्त नहीं है। ज्यादा तापमान से फसलों की ग्रोथ प्रभावित होती है।
Published on:
18 Dec 2022 08:32 pm
बड़ी खबरें
View Allभिवाड़ी
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
