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जीएसएस का हो रहा डिजिटाइजेशन, विद्युत आपूति में आएगा सुधार

ग्रिड सब स्टेशन (जीएसएस), फीडर और ट्रांसफार्मर के डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया चल रही है। भिवाड़ी सर्किल में स्थित 11 केवी, 33 केवी जीएसएस का नेटवर्क डिजिटाइजेशन किशनगढ़बास क्षेत्र से शुरू हो चुका है।

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भिवाड़ी

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Dharmendra dixit

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Dharmendra Dixit

May 30, 2026

bhiwadi news

ट्रांसफार्मर पर अधिक भार होने पर फुंकने से बचेगा

भिवाड़ी. ग्रिड सब स्टेशन (जीएसएस), फीडर और ट्रांसफार्मर के डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया चल रही है। भिवाड़ी सर्किल में स्थित 11 केवी, 33 केवी जीएसएस का नेटवर्क डिजिटाइजेशन किशनगढ़बास क्षेत्र से शुरू हो चुका है। इसके जरिए सभी जीएसएस, फीडर और ट्रांसफार्मर के लोड की रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी। किस जीएसएस, फीडर और ट्रांसफार्मर पर कितना विद्युत भार चल रहा है। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद अधिक भार की वजह से ट्रांसफार्मर फुंकने, फीडर पर अधिक भार होने से ट्रिपिंग और फॉल्ट की समस्या को रोका जा सकेगा। निगम जेईएन को जीएसएस का सीधा डाटा मोबाइल एप पर मिलेगा। इसके जरिए डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर (डीटी) और उपभोक्ताओं की इंडेक्सिंग भी हो सकेगी। एक ट्रांसफार्मर पर कितने उपभोक्ता हैं, उनकी खपत कितनी है, खपत में अंतर आने पर भी उसका विश्लेषण किया जा सकेगा। छीजत का पता भी चल जाएगा। भिवाड़ी सर्किल में 33/11 केवी के 102 जीएसएस हैं। 33 केवी के 94 फीडर हैं, 11 केवी के 608 फीडर हैं। जबकि 22380 सिंगल फेज और 55286 थ्री फेज ट्रांसफार्मर हैं।

जीएसएस और ट्रांसफार्मर डिजिटाइजेशन से अधिक भार होने पर पहले ही सूचना मिलेगी, जिससे उपकरणों को खराब होने से बचाया जा सकेगा। विद्युत आपूर्ति में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। जेपी बैरवा, एसई, ओएंडएम

हर महीने औद्योगिक संगठन के साथ बैठक करेंगे अधीक्षण अभियंता

भिवाड़ी. प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में जयपुर डिस्कॉम ने महत्वपूर्ण निर्णय किया है। इसके अंतर्गत सभी ओएंडएम सर्किल में अधीक्षण अभियंता को क्षेत्र की औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ प्रति महीने बैठक करनी होगी। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना, इसमें किसी भी प्रकार की देरी को खत्म करना और औद्योगिक क्षेत्रों में निर्बाध आपूर्ति करना है। इन बैठकों में औद्योगिक कनेक्शन के लिए आए नए आवेदनों की समीक्षा की जाएगी कि वे किस स्तर पर प्रक्रियाधीन हैं। यदि कोई आवेदन लंबे समय से अटका हुआ है तो उसके तकनीकी या प्रशासनिक कारणों की समीक्षा कर उचित समाधान निकाला जाएगा। इसके अतिरिक्त औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की ट्रिपिंग, कम वोल्टेज या अन्य तकनीकी समस्याओं को लेकर उद्यमियों से सीधा फीडबैक लिया जाएगा ताकि सप्लाई में सुधार किया जा सके। इससे उद्योगों और निगम के बीच सीधा संवाद स्थापित होगा। यह निर्णय कनेक्शन, विद्युत आपूर्ति एवं बिलिंग सहित उद्यमियों की विद्युत संबंधी अन्य समस्याओं के त्वरित निराकरण में प्रभावी सिद्ध होगा। इस संबंध में निदेशक तकनीकी ने सभी ओएंडएम वृत्त अधीक्षण अभियंताओं को आदेश जारी किए हैं।