9 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जो व्यवसाय बचपन से सीखा, उसे छोड़ा, रबर रिसाइक्लिंग की चुनौती स्वीकारी

बदलाव बदल देता है जिंदगी का नजरियाभिवाड़ी. सिर्फ एक काम सीखना और करना आसान है लेकिन सीखे हुए काम को छोडक़र करना बहुत कठिन है। क्योंकि कोई भी काम आपको एक साथ सफलता नहीं देता। किसी व्यवसाय उत्पाद को स्थापित करने में दशकों का कठिन परिश्रम लग जाता है लेकिन कई बार बदलाव आपकी जिंदगी […]

2 min read
Google source verification

पुरानी मशीनों ने बहुत परेशान किया लेकिन हिम्मत नहीं हारी

बदलाव बदल देता है जिंदगी का नजरिया
भिवाड़ी. सिर्फ एक काम सीखना और करना आसान है लेकिन सीखे हुए काम को छोडक़र करना बहुत कठिन है। क्योंकि कोई भी काम आपको एक साथ सफलता नहीं देता। किसी व्यवसाय उत्पाद को स्थापित करने में दशकों का कठिन परिश्रम लग जाता है लेकिन कई बार बदलाव आपकी जिंदगी बदल देता है।
विवेक जैन ने बताया कि उनका जन्म दिल्ली में हुआ। पिता सरकारी शिक्षक थे। दिल्ली विवि से 1997 में स्नातक किया। चाचा स्टेनलेस स्टील का काम करते थे। पारिवारिक काम होने की वजह से मुझे भी इस काम की अच्छी जानकारी हो गई, ग्रेजुएशन करने के बाद मैंने भी स्टेनलेस स्टील का बजीरपुर दिल्ली में साझेदारी में व्यवसाय शुरू किया। काम अच्छा चला। 2004 में मेरी शादी पूजा जैन से हुई। पारिवारिक कारणों से 2006 में साझेदार अलग हो गए। इसके बाद चौपानकी में रबर वेस्ट रिसाइक्लिंग का काम शुरू किया। इसमें रबर का बुरादा और रीक्लेम शीट बनाते हैं। यह काम मेरे लिया नया था। जो काम बचपन से सीखा उसे छोडऩा आसान नहीं था। काम बदलने के साथ शहर भी दूसरा हो गया। दिल्ली छोडक़र भिवाड़ी में काम करने आ गए। स्टेनलेस स्टील का काम भी कर सकता था लेकिन उस काम में वही ग्राहक और बाजार था। उन्हीं ग्राहकों को तोडऩा पड़ता, जिसकी वजह से दूसरा सेक्टर चुना, जिसकी मुझे बिल्कुल जानकारी नहीं थी। चौपानकी में एक अन्य रबर फैक्ट्री है, उसके मालिक अमित जैन ने इस काम को सिखाने और आगे बढ़ाने में बहुत मदद की। अमित जैन मेरे दोस्त हैं। उनकी वजह से मैंने ये काम शुरू किया। अब मेरा टर्नओवर आठ करोड़ रुपए का है। रबर का काम शुरू करते समय पुरानी मशीन खरीदीं, उसमें बड़ी परेशानी आई। शुरू में खूब संघर्ष करना पड़ा। 2018 में रीको चौक पर एक अन्य औद्योगिक भूखंड खरीदा और 2020 में यहां उत्पादन शुरू कर दिया। नई मशीन लगाकर उत्पादन क्षमता बढ़ा ली, जिसके बाद अब काम आगे बढ़ रहा है। शुरुआत में रबर का काम करते समय पुरानी मशीनों से बहुत परेशानी आई। पूंजी कम थी, मशीनों की वजह से ब्रेकडाउन अधिक होता था, कई बार उत्पादन बदलने की सोची लेकिन धीरे-धीरे काम को समझा और मुश्किलों को आसान किया। अब दर्जनों लोगों को रोजगार देकर एक अलग सुकून मिलता है।

जिंदगी में उतार-चढ़ाव जरूरी
विवेक कहते हैं कि जिंदगी में उतार-चढ़ाव और बदलाव जरूरी है। जिंदगी में छोटी-छोटी परीक्षाओं को बड़ी प्रतियोगिता की तैयारी समझना चाहिए। किसी भी क्षेत्र में चले जाएं, हर जगह चुनौती मिलेगी। उनको स्वीकार करने पर ही मंजिल मिलेगी। जो डर गया वह मर गया वाली कहावत हर जगह लागू होती है। काम कोई भी हो बहुत ध्यान देकर मेहनत की जरूरत होती है। एक लंबे अर्से के बाद सफलता मिलती है। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता।