
लहलहाती फसलों से खुशहाली का उल्लास
भिवाड़ी. मधुमास के नाम से जाने जाना वाला माघ का महीना उमंग-उत्साह लेकर आता है। इसी माह में बसंत पंचमी मनाई जाती है। यह भारतीय प्रमुख पर्वों में से एक है। यह माघ मास शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा-आराधना की जाती है। इस दिन मां सरस्वती का अवतरण हुआ था। इस दिन मांगलिक कार्य शुरू होते हैं। जिनकी तैयारियों में लोग जुटे नजर आ रहे हैं।
भगवती सरस्वती का बसंत पंचमी पर शुभ मुहूर्त में शिक्षण संस्थानों में पूजन किया जाता है। बसंत पंचमी को श्रीपंचमी, मां सरस्वती पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। किसी शुभ काम के लिए बसंत पंचमी का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। शादी-समारोह, सगाई-संबंध, मुंडन संस्कार, नया गृह प्रवेश सभी के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। बसंत पंचमी पर्व पर ही मां सरस्वती का अवतरण हुआ था। इसीलिए इस दिन मां सरस्वती जी की पूजा की जाती है। मां सरस्वती की पूजा से मानसिक विकार दूर होते हैं। कहा जाता है कि बसंत ऋतु का आगमन बसंत पंचमी के दिन से होता है। इस दिन से सर्दी कम हो जाती है। बसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र धारण कर विधि विधान के साथ मां सरस्वती की आराधना भी पीले पुष्पों से की जाती है।
मांगलिक कार्यों की भी धूम
मल मास खत्म होने साथ ही मांगलिक कार्यों की भी धूम हैं। मैरिज होम व होटल सजने लगे है। बसंत पंचमी के अवसर पर 25 व 26 जनवरी को शादी-समारोह की धूम रहने वाली है। शादियों को देखते हुए ज्यादातर होटल व रिसोर्ट बुक हो चुके है। धर्मशालाएं व सामुदायिक भवन भी पहले ही बुक हो चुके। शादियों के सीजन के चलते बाजारों में भी भीड़ रहने लगी है। रेडिमेड कपड़े, साडिय़ां, ज्वैलरी, फर्नीचर, इलेक्ट्रोनिक व ऑटोमोबाइल आइटम की खूब खरीदारी हो रही है। बाजारों में खरीदारी का दौर देर शाम तक चलने से रौनक बनी हुई है। बसंत पंचमी के सावे के लिए मैरिज होम के साथ तिजारा सहित अन्य किलों में भी बुकिंग हो चुकी है। यहां देश के अलग अलग भागों से वर व वधू पक्ष के लोग एक ही जगह पर शादी करने आ रहे है। पहले जहां वैवाहिक आयोजन पांच से सात दिन तक चलते थे, लेकिन अब यह दो दिन में ही सिमट कर रह गए। इन दो दिनों में हल्दी, मेहंदी, महिला संगीत के साथ चाक पूजन, भात की रश्में पूरी की जाती है।
Published on:
23 Jan 2023 04:39 pm
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