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कारोली जीएसएस सिविल टेंडर नहीं हुआ, क्रमोन्नत का काम अटका

132 केवी से 220 केवी जीएसएस में होगा परिवर्तित, क्षेत्र का तीसरा 220 केवी होगा, जीएसएस से अतिरिक्त भार कम होगा

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कारोली जीएसएस सिविल टेंडर नहीं हुआ, क्रमोन्नत का काम अटका

कारोली जीएसएस सिविल टेंडर नहीं हुआ, क्रमोन्नत का काम अटका


भिवाड़ी. करोली स्थित 132 केवी जीएसएस के क्रमोन्नत होने का काम सिविल वर्क के टेंडर नहीं होने से अटक रहा है। इलेक्ट्रिकल वर्क के दो करोड़ और 25 लाख से जीएसएस के कार्यादेश जारी कर दिए हैं, लेकिन ये काम सिविल वर्क के बाद होंगे। सिविल वर्क के छह करोड़ के टेंडर अभी प्रक्रियाधीन हैं। पहले भी सिविल वर्क के टेंडर हुए लेकिन विभिन्न वजह से अंतिम स्तर तक नहीं पहुंच सके। इसकी वजह से दोबारा प्रक्रिया चल रही है। सिविल का काम शुरू होने के बाद इलेक्ट्रिकल का होगा। इलेक्ट्रिकल में भी दो लाइन के टेंडर करने के बाद कार्यादेश जारी कर दिए हैं। एक लाइन के टेंडर होना शेष है। यह सभी काम मार्च 2025 तक पूरे होने हैं।
औद्योगिक क्षेत्र कारोली स्थित 132 केवी जीएसएस को अपग्रेड (क्रमोन्नत) किया जा रहा है। इसके लिए 42.66 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। इस जीएसएस के निर्माण होने के बाद भिवाड़ी और खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों को विद्युत आपूर्ति को लेकर बड़ा लाभ होगा। यह क्षेत्र का तीसरा 220 केवी जीएसएस होगा। इस जीएसएस का निर्माण होने के बाद औद्योगिक इकाइयों को भरपूर, निर्बाध एवं गुणवत्ता की बिजली मिल सकेगी। बार-बार के फॉल्ट, ट्रिपिंग से राहत मिलेगी।
कारोली अभी 132 केवी जीएसएस है, इसे 220 अपग्रेड किया जाना है। इलेक्ट्रिकल वक्र्स का टेंडर हो चुका है। सिविल का टेंडर आचार संहिता से पहले किया था, लेकिन तकनीकि कारणों से नहीं हो सका, अब दोबारा खोला गया, लेकिन आवेदक नहीं आया, जिसकी वजह से टेंडर अवधि को बढ़ाया गया है। सिविल का काम होने के बाद इलेक्ट्रिकल का काम शुरू होगा। सिविल वर्क में चारदीवारी, उपकरणों की फाउंडेशन का निर्माण कार्य और ग्राउटिंग जैसे काम होने हैं। लेकिन सिविल का टेंडर नहीं होने की वजह से देरी हो रही है। कारोली बिलाहेड़ी और खुशखेड़ा के बाद तीसरा 220 केवी जीएसएस होगा।
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खुशखेड़ा और भिवाड़ी को होगा लाभ
कारोली जीएसएस के 132 से 220 केवी में क्रमोन्नत होने पर औद्योगिक क्षेत्र भिवाड़ी और खुशखेड़ा को बहुत लाभ मिलेगा। अभी 220 केवी जीएसएस भिवाड़ी और खुशखेड़ा पर अतिरिक्त भार है। भिवाड़ी जीएसएस पर तो कई बार कटौती कर सिस्टम को नुकसान होने से बचाया जाता है। ओवरलोड होने की स्थिति में कई बार ट्रिपिंग हो जाती है। कारोली का निर्माण होने से अतिरिक्त भार यहां आ जाएगा। एक 220 केवी जीएसएस में खराबी आने पर भी दूसरे से आपूर्ति सुचारू की जा सकेगी।
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जो टेंडर बचे हैं उनकी भी जल्द एनआईटी जारी की जाएगी। जिससे कि काम को तय समय में पूरा किया जा सके।
राजेंद्र प्रसाद गुप्ता