भिवाड़ी. कंपनियों से आ रही केमिकल युक्त गंदे पानी का शोधन कॉमन इंफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) में शुरू हो चुका है। अब छह एमएलडी का आरओ भी शुरू हो चुका है। कंपनियां अपने पैरामीटर बताएंगी, उसके बाद कंपनियों को उनकी गुणवत्ता और क्षमता के अनुसार आरओ से शोधित पानी दिया जाएगा। आरओ का पानी कंपनियों को किस दर पर दिया जाएगा, इसका निर्धारण एसपीवी करेगी। प्रोजेक्ट लगभग पूरा हो चुका है। आगे से सीईटीपी का संचालन भी एसपीवी की देखरेख में होगा। रखरखाव का काम निर्माण एजेंसी दस साल तक करेगी। सीईटीपी में आरओ शुरू होने के बाद कंपनियों को भूमिगत जल का उपयोग नहीं करना होगा। केमिकल युक्त गंदा पानी भिवाड़ी की सडक़ों पर भरा नजर नहीं आएगा।
138 करोड़ का सीईटीपी निर्माण कार्य और पाइपलाइन बिछाए जाने का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद कंपनी दस साल तक रखरखाव करेगी जिसके लिए एजेंसी को 3.72 करोड़ रुपए प्रति वर्ष दिए जाएंगे। प्रोजेक्ट में फैक्ट्रियों से गंदा पानी लाने के लिए 58 किमी, शोधन के बाद सीईटीपी से फैक्ट्री में पानी पहुंचाने के लिए 90 किमी लाइन बिछाई गई है। लाइन बिछाने के खोदी गई सडक़ों का निर्माण हो चुका है। फैक्ट्रियों में कनेक्शन देने का काम भी पूरा हो चुका है। अब जल्द ही आरओ से शोधित पानी को दोबारा उपयोग के लिए फैक्ट्रियों को दिया जाएगा।
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कई लाभ मिलेंगे
सीईटीपी अपग्रेडेशन का प्रोजेक्ट सात नवंबर 2021 को शुरू हुआ था। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद भिवाड़ी में केमिलक युक्त काले पानी को खुले में छोड़े जाने की समस्या हल होगी। केमिकल युक्त पानी का बेहतर तरीके से शोधन होने के बाद फैक्ट्रियों में वापस उपयोग होगा। इस तरह कई लाभ होंगे। पहले भूमिगत जल का कम उपयोग होगा, दूसरा केमिकल युक्त पानी खुले में नहीं छोड़ा जाएगा और तीसरा शोधित पानी से ही फैक्ट्रियों में उत्पादन होगा।
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सीईटीपी प्रोजेक्ट पूरा हो चुका है। नए प्लांट से शोधन हो रहा है। आरओ भी शुरू हो चुका है, जल्द ही फैक्ट्रियों को शोधित पानी उपयोग के लिए दिया जाएगा।
जीके शर्मा, इकाई प्रभारी, रीको