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सात साल पुराना टोल शिफ्ट का मामला फिर सुर्खियों में आया

कई आंदोलन हुए, हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला, शिफ्ट से बचने कार्ड भी बनाए

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सात साल पुराना टोल शिफ्ट का मामला फिर सुर्खियों में आया

सात साल पुराना टोल शिफ्ट का मामला फिर सुर्खियों में आया


भिवाड़ी. खिजूरीबास टोल को नगर परिषद सीमा से बाहर करने का मामला एक बार फिर सुर्खियों में हैं। विधायक बालकनाथ योगी ने इस संबंध में रिडकोर को निर्देश देकर करीब सात साल पुराने मुद्दे को फिर हवा दी है। क्योंकि टोल को परिषद सीमा से बाहर करने के लिए सामाजिक संस्थाओं द्वारा 2016 से आंदोलन किए जा रहे हैं लेकिन अभी तक किसी को सफलता नहीं मिली है। मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा वहां कई बार सुनवाई भी हुई लेकिन अधिकारियों ने वहां भी अडंगा लगाए रखा। वहीं सामाजिक संस्थाओं के आंदोलन को भी राजनीतिक संरक्षण की वजह से कुचलने का प्रयास किया गया। आंदोलन को चलाने वाले एक दो सदस्यों को अन्य मामलों में फंसाकर जेल भी भेजा गया। रिडकोर उक्त टोल को परिषद सीमा से बाहर इसलिए नहीं चाहती क्योंकि इससे उसे रोजाना लाखों रुपए का नुकसान होगा। फैक्ट्री क्षेत्र में बाहर से आने वाले भारी वाहन एवं आवासीय सोसायटी में रहने वाले परिवारों के परिचितों को टोल नहीं देना पड़ेगा। चुनाव से पूर्व किशनगढ़बास विधायक दीपचंद खैरिया ने भी टोल को शिफ्ट कराया था। यह मामला भी काफी चर्चा में रहा था। खिजूरीबास टोल को शिफ्ट कराने के लिए ग्रामीणों ने भी कई बार उग्र आंदोलन किए। ग्रामीणों का कहना था कि टोल के दोनों तरफ गांव ढाणी है, उन्हें अपने गांव जाने के लिए भी टोल चुकाना पड़ता है।
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हजारों परिवार टोल से उधर
टोल से उस तरफ दर्जनों की संख्या में आवासीय सोसायटी हैं, जिनमें हजारों परिवार रहते हैं। ये परिवार फैक्ट्रियों में काम करने और खरीदी के लिए भिवाड़ी आते हैं। इस तरह प्रत्येक परिवार को दिन में एक बार आना-जाना हो जाता है। टोल बीच में होने से इन्हें टोल चुकाना पड़ता है, साथ ही जाम लगने से समय भी बर्बाद हो जाता है।
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कार्ड बनाए लेकिन वहां भी गली निकाली
पूर्व विधायक संदीप यादव ने स्थानीय जनों को टोल से बचाने के लिए कार्ड बनवाए। कैंप लगाकर कार्ड दिए गए। लेकिन रिडकोर की मिलीभगत से टोल कंपनी ने वहां भी गली निकाल दी। एक बार कार्ड बन जाने के बाद उनके बार-बार नवीनीकरण का फॉर्मूला निकाल दिया, जिससे सोसायटी आवासियों को दिक्कत होने लगी। गाड़ी में फास्टेग होने पर पैसे कटने लगे, जिससे आमजन को असुविधा होने लगी।
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हाईकोर्ट भी पहुंचा मामला
नियमानुसार टोल को नगर परिषद सीमा से बाहर होना चाहिए। इस मामले को लेकर टाउन आरडब्ल्यूए अध्यक्ष एके ङ्क्षसह हाईकोर्ट भी लेकर गए। हाईकोर्ट में भी कई बार मामले की सुनवाई हुई। नगर परिषद, रिडकोर अधिकारियों को उधर तलब भी किया गया। लेकिन सुनवाई में देरी होने से टोल को शिफ्ट करने का मामला अटका ही रहा।