भिवाड़ी. औद्योगिक इकाइयों से निकले गंदे पानी के शोधन के लिए कॉमन इंफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) का निर्माण कार्य एक बार फिर देरी की तरफ बढ़ गया है। छह मई को निर्माण कार्य पूरा होना था। लेकिन तय अवधि में पूरा नहीं होने की वजह से रीको ने हाल ही में किए गए बिल भुगतान में 70 लाख रुपए की कटौती की है। इससे पूर्व भी निर्माण एजेंसी त्रिवेणी इंजीनियरिंग के निर्माण कार्य का जब आंकलन किया गया तो उसमें हर बार देरी देखने को मिली। तब भी कई बार में कंपनी को किए गए बिल भुगतान में से 5.52 करोड़ रुपए की राशि को रोका गया था। इस तरह अभी तक कंपनी के बिल भुगतान में से 6.22 करोड़ रुपए की राशि को रोका गया है। रीको अधिकारियों ने बताया कि एनएच पर लाइन बिछाने का काम किया जाना था, वहां से अनुमति नहीं मिली, इस वजह से भी काम में देरी हुई है। निर्माण एजेंसी का जब अंतिम भुगतान होगा, उसमें देखा जाएगा कि किस वजह से देरी हुई, कंपनी की तरफ से काम में जितनी देरी मिलेगी, उतना भुगतान रोका जाएगा। 138 करोड़ के निर्माण कार्य में से अभी तक 75 करोड़ का काम हो चुका है। रीको अधिकारियों का कहना है कि सीईटीपी पर लगने वाली मशीनें भी आ चुकी हैं, जिनकी कीमत को जोड़ा नहीं गया है। निर्माण एजेंसी को 15 जुलाई तक काम पूरा करने की अवधि दी गई है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद कंपनी दस साल तक रखरखाव भी करेगी जिसके लिए एजेंसी को 3.72 करोड़ रुपए प्रति वर्ष दिए जाएंगे।
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अभी ये भी पेचीदगी
राजस्थान पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (आरपीसीबी)े द्वारा 343 इकाइयों को सीईटीपी में पानी छोड़े जाने की अनुमति है। जबकि प्रोजेक्ट 1552 इकाइयों के लिए डिजायन किया गया है। अब शेष इकाइयों को जिम्मेदार विभाग कब तक अनुमति देंगे। या ये इकाई पहले की तरह ही चोरी छिपे गंदा पानी नालों में छोड़ती रहेंगी। क्योंकि जिम्मेदार अधिकारियों को ये भी नहीं पता होता कि कौन सी इकाई गंदा पानी छोड़ रही है। मतलब जिन अधिकारियों ने १७५ करोड़ का प्रोजेक्ट शुरू कर दिया, प्रोजेक्ट भी कुछ दिनों में पूरा होने वाला है, उन्हें यहां के डाटा तक की जानकारी नहीं है। समय पर सभी इकाई कनेक्शन नहीं लेंगी तो फिर गंदा पानी कहां से आएगा और शोधित पानी कौन लेगा।
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इतना निर्माण हुआ
प्रोजेक्ट में फैक्ट्रियों से गंदा पानी लाने के लिए ५८ किमी, शोधन के बाद सीईटीपी से फैक्ट्री में पानी पहुंचाने के लिए ९० किमी लाइन बिछाई गई है। लाइन बिछाने के लिए सडक़ों की खुदाई हुई है। लाइन बिछने की वजह से औद्योगिक क्षेत्र की अधिकांश सडक़ खुदी पड़ी हैं। रीको का दावा है कि 95 फीसदी लाइन, 90 फीसदी मशीनरी और टंकी निर्माण का काम पूरा हो चुका है। टूटी सडक़ों का सुधारीकरण १५ जून तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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आमजन को ये होगी समस्या
जब तक प्रोजेक्ट पूरा नहीं होता तब तक आमजन भी इससे प्रभावित रहेगा। क्योंकि लाइन बिछाने के लिए खोदी गई सडक़ों के सुधारीकरण का काम देरी से होगा। वहीं बारिश के दौरान फैक्ट्रियों द्वारा गंदा पानी छोडऩे से होने वाले जलभराव से भी वाहन चालक और आमजन मुसीबत में आएंगे। गंदा काला पानी धारूहेड़ा जाएगा, जिससे दो राज्यों के बीच विवाद की स्थिति पैदा होगी।
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कंपनी को फिलहाल जो बिल भुगतान किया गया, उसमें काम का आंकलन किया गया, देरी की वजह से 70 लाख रुपए की राशि रोकी गई है, अंतिम भुगतान में सभी तथ्यों का आंकलन होगा कि किस स्तर पर देरी हुई है।
जीके शर्मा, इकाई प्रभारी