25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

100 साल पुराने ब्रिज बेहतर, दस साल वाले तोड़ने लगे दम

सबहेड- बीते 12 साल में 10 ब्रिज बनें, अधिकतर में टूटफूटभोपाल.इंट्रो..नए नौ दिन, पुराने सौ दिन…राजधानी के ब्रिज पर ये कहावत फिट होती है। 1777 से 2011 के पहले तक बने पांच ब्रिज आज भी कायम है। थोड़े मेंटेनेंस के साथ ये लोगों को आवाजाही का एक बेहतर रास्ता दे रहे हैं, जबकि 2012 के […]

2 min read
Google source verification

सबहेड- बीते 12 साल में 10 ब्रिज बनें, अधिकतर में टूटफूट
भोपाल.
इंट्रो..नए नौ दिन, पुराने सौ दिन…राजधानी के ब्रिज पर ये कहावत फिट होती है। 1777 से 2011 के पहले तक बने पांच ब्रिज आज भी कायम है। थोड़े मेंटेनेंस के साथ ये लोगों को आवाजाही का एक बेहतर रास्ता दे रहे हैं, जबकि 2012 के अब तक 12 साल में 11 ब्रिज बनाए और सब टूटी-फूटी स्थिति में आ गए हैं। अधिकतर की स्लैब में गड्ढे और इनसे बाहर झांकते लोहे के एंगल कमजोर गुणवत्ता की कहानी बयां करते हैं।

ब्रिज से समझे नए और पुराने ब्रिज

  • 2011 के पहले शहर में पांच ब्रिज ही थे। 1777 में बना पुल पुख्ता, इसी समय बना रेलवे लाइन पर पुल बोगदा, सर्वधर्म पुल, भदभदा पुल के साथ करीब 50 साल पहले बना चेतकब्रिज व भारत टॉकीज ब्रिज ही थे।स्थिति- पुल पुख्ता नवाब कालीन है, जबकि पुल बोगदा अंग्रेजों ने रेलवे के लिए बनाया था। इनमें सुधार किया और ये काम कर रहे हैं। चेतकब्रिज, भारत टॉकीज ब्रिज में सुधार किया और अब ये भी काम कर रहे। भदभदा का पुराना ब्रिज व सर्वधर्म का ब्रिज भी सिक्सलेन का काम शुरू होने से पहले अपेक्षाकृत बेहतर था। अब इसे नए सिरे से बनाया जा रहा।
  • 2011 से 2022 के बीच दस ब्रिज बने। छोला ओवरब्रिज, सुभाष ओवरब्रिज, वीर सावरकर ओवरब्रिज, दानिशकुंज ब्रिज, जेके अस्पताल पुल, जीएडी ब्रिज, केबल स्टे ब्रिज, करोद ओवरब्रिज, बावड़िया ब्रिज, आर्चब्रिज बने है। बारिश में सभी में गड्ढे हैं और जर्जर स्थिति में है।

एक्सपर्ट बोले…ब्रिज की स्लैब में बाइब्रेशन की कमी भी

  • रिटायर्ड चीफ इंजीनियर पीके भल्ला का कहना है कि ब्रिज हो या सीसी रोड है। सीसी मटेरियल को मशीन से वाइब्रेशन से जमाया नहीं गया और एयर रहती है तो दबाव की वजह से टूट आ जाती है। इससे बचने की जरूरत है। रेलवे या पीडब्ल्यूडी की बात नहीं है, नए ब्रिज में रेलवे से लेकर पीडब्ल्यूडी। सभी के हिस्सों में गड्ढे व टूट देखने को मिल रही। इंजीनियरों और ठेकेदार पर कार्रवाई की जरूरत है।