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लावारिस मरीज को लेकर पहुंची 108 तो अस्पताल के गार्ड पायलट से कहा यहां क्यों ले आए इस मरीज को

लावारिस मरीजों को भर्ती करने में हमीदिया अस्पताल प्रबंधन करता है आनाकानी, कई बार होते हैं विवाद

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भोपाल

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Sunil Mishra

Mar 15, 2019

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108 एंबुलेंस में थर्मामीटर तक नहीं

हमीदिया अस्पताल के सिक्युरिटी गार्डों द्वारा मरीजों और उनके परिजनों के साथ बदतमीजी और दुव्र्यवहार करने के मामले आम है। हालात यह है कि कई बार गार्ड मरीजों के तीमारदारों के साथ हाथापाई करने से भी बाज नहीं आते। गुरुवार को भी ऐसा ही एक मामला सामने आया। सिक्युरिटी गार्डों ने ना केवल मरीज को भर्ती करने से मना कर दिया बल्कि 108 के कर्मचारियों के साथ मारपीट की कोशिश भी की।
मामला गुरुवार सुबह करीब 9.30 बजे का है। अशेाका गार्डन की 108 को कॉल मिला कि शांती नगर में एक मरीज है, जिसे तत्काल हमीदिया अस्पताल पहुंचाना है। 108 के पायलट संजीव रघुवंशी ने बताया कि वे जब शांती नगर पहुंचे तो 60 वर्षीय बुजुर्ग सड़क पर गिरे हुए थे। उसने हाथ और पैर में चोट लगी हुई थी। जब वे मरीज को हमीदिया अस्पताल लेकर पहुचें वहां गार्डों ने मरीज को अस्पताल में ले जाने से मना कर दिया। पायलट ने जब कहा कि मरीज गंभीर है तो गार्डों ने 108 कर्मचारियों को डंपट दिया और कहा कि इसे जहां से लाए हो वहीं छोड़ आओ। हम लावारिस मरीजों को भर्ती नहीं करते।

सीएमओ ने भी नहीं किया भर्ती
गार्ड जब नहीं मान रहे थे तो 108 कर्मचारी अस्पताल के सीएमओ डॉ.़ गौर के पास पहुंचे। हालांकि उन्होंने मरीज को इंजेक्शन लगवाकर कहा कि इसे वापस ले जाओ। इस पर कर्मचारियों ने कहा कि हमारा काम मरीजों को अस्पताल में लाना है आप इसे भर्ती कर लें।

वीडियो बनाया तो की मारपीट
सीएमओ के मना करने पर 108 कर्मचारी गार्ड और सीएमओ का वीडियो बनाने लगे। कर्मचारियों का आरोप है कि सीएमओ ने गार्ड से कहा कि इसका मोबाइल ले लो और कोने में ले जाकर जमकर पिटाई लगाओ तब समझ आएगा।

पहले भी हो चुकी है मरीज की मौत

करीब तीन माह पहले 108 एंबुलेंस रात 11.30 बजे 60 साल के बुजुर्ग को हमीदिया अस्पताल लेकर पहुंची थी। लेकिन गार्डों ने बुजुर्ग को भर्ती करने से इंकार कर दिया। इस दौरान भी विवाद की स्थिति बनी और बुजुर्ग को बाहर ही छोड़ दिया। पूरी रात कड़ाके की ठंड में बाहर पड़े रहने से बुजुर्ग की मौत हो गई।

एक बुजुर्ग को
जिन मरीजों की स्थिति भर्ती करने लायक होती है, उन्हें हम भर्ती कर लेते हैं। सभी मरीजों को भर्ती नहीं किया जा सकता।

डॉ.़ एके श्रीवास्तव, अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल