26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भारी बारिश के कारण 2016 के बाद कोलार डैम के खोले गए 2 गेट, घरों के अंदर पहुंचा पानी

आखिरकार कोलार डैम के खुले गेट...मानसून मेहरबान : सितंबर के पहले 9 दिन में टूट गया 8 साल का रेकॉर्डरेकॉर्ड तोड़ बारिश: पिछले 24 घंटों में सोमवार सुबह तक 140 मिमी बारिश दर्ज, राजधानी के जल स्रोतों समेत नाले-नालियां उफान परभोपाल की आधी से अधिक आबादी की प्यास बुझाने वाला कोलार डैम हुआ लबालब, साल 2016 के बाद इस साल खोले गए दो गेट

7 min read
Google source verification

भोपाल

image

Amit Mishra

Sep 10, 2019

kolar dam

भोपाल। भरपूर मेहरबान मानसून से इस साल सितंबर के पहले नौ दिनों में जितना पानी बरसा, उतना पिछले आठ साल में पूरे सितंबर महीने में नहीं गिरा। राजधानी में एक से नौ सितंबर को शाम तक 238.7 मिमी पानी गिरा, जबकि वर्ष 2011 में पूरे सितंबर महीने में 278.5 बारिश हुई थी। मौसम विभाग के मुताबिक पिछले 24 घंटों में सोमवार सुबह तक 140 मिमी बारिश दर्ज हुई। यह सीजन में दूसरी सबसे अधिक है। इससे पहले 30 जुलाई को 166.5 मिमी बारिश हुई थी।

24 घंटों में रुक-रुककर बारिश होगी
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 24 घंटों में रुक-रुककर बारिश होगी। हालांकि बुधवार से कुछ राहत मिल सकती है। राजधानी में रविवार की तरह सोमवार की शुरुआत बारिश से हुई। सुबह 8.30 से शाम 5.30 बजे तक 12.3 मिमी बारिश हो चुकी थी। इस सीजन में बारिश का आंकड़ा 1495.6 मिमी पहुंच गया। सोमवार को अधिकतम तापमान रविवार की तुलना में 1.5 डिग्री गिरकर 25.8 डिग्री दर्ज हुआ। न्यूनतम तापमान 23.6 डिग्री रहा।

इस मानसून सर्वाधिक
तारीख -------------- ---- बारिश
30 जुलाई --------------166.5
27 अगस्त-------------- 123
24 अगस्त -------------- 117
23 अगस्त -------------- 115
15 अगस्त -------------- 67
09 अगस्त -------------- 98

अभी तक पांच बार कोलार डैम के गेट खुले
शहर की 60 फीसदी से अधिक आबादी की प्यास बुझाने वाले कोलार डैम के 462.20 मीटर एफटीएल पर पहुंचते ही सोमवार को इसके आठ में से दो गेट (क्रं.-4 व 5) खोलने पड़े। इनमें से प्रति सेकंड 116 क्यूबिक मीटर पानी डिस्चार्ज हो रहा है। यह पानी नीलकंठ गांव के पास नर्मदा नदी में मिलता है। इससे पहले 17 सितंबर 2016 को डैम के गेट खोले थे। वर्ष 1984 में निर्माण के बाद अभी तक पांच बार कोलार डैम के गेट खुले हैं।


तीन वर्ष की जलापूर्ति के लिए पर्याप्त पानी
जल संसाधन विभाग के अधीक्षण यंत्री अमिताभ मिश्रा ने बताया कि डैम के दो गेट शाम 4.30 बजे खोले गए। अब कोलार डैम में इतना पानी आ गया है, जो शहर में तीन वर्ष की जलापूर्ति के लिए पर्याप्त है। उधर, भदभदा डैम के गेट रेकॉर्ड 30 घंटे से अधिक समय के लिए खोले गए। कलिसायोत डैम के गेट भी इतनी ही देर के लिए खुले रहे।

यहां घरों के अंदर पहुंचा पानी
ओरा मॉल बेसमेंट, शिवनगर फेस-तीन, अवंतिका स्कूल, पंजाबी बाग, अप्सरा टॉकीज, आईआईएफएम के पास मांडवा बस्ती, ई-6 अरेरा कॉलोनी में साईं बोर्ड, वार्ड 72 स्थित जैन मंदिर, मिनाल रेसीडेंसी, आस्था हाइट्स, कल्पना नगर, सोनागिरी, हेमू कालानी नगर, सिद्धार्थ नगर , शारदा नगर फेस-2, सर्वधर्म, कैलाश नगर फेस-3, स्टील टावर,भदभदा चौराहा, नालंदा पब्लिक स्कूल के सामने, मिसरोद।


पेड़ हुए धराशायी
बारिश के कारण राजधानी के अलग-अलग क्षेत्रों से पेड़ों के गिरने की सूचना मिली है। जानकारी के मुताबिक सरिता कॉम्प्लेक्स, साउथ टीटी नगर, गुलमोहर, अटल-नेहरू नगर, गली नंबर एक भानपुर और जिला कोषालय में पेड़ धराशायी हुए।

जलभराव वाले क्षेत्रों में कलेक्टर-डीआईजी
कलेक्टर तरुण पिथोड़े, डीआईजी इरशाद वली समेत अन्य अधिकारी दामखेड़ा सेक्टर बी और समरधा राहत कैम्पों में पहुंचे। उन्होंने विस्थापितों को सुविधाएं मुहैया कराने कहा। इसके बाद दोनों अधिकारी मिसरोद स्थित जलभराव वाले क्षेत्रों में गए। इधर, हताईखेड़ा डैम के आसपास डूब क्षेत्रों का एसडीएम ने निरीक्षण किया।

इन क्षेत्रों में चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन


कोलार के समरधा गांव में जलभराव होने पर निगम अमले ने लोगों को स्कूल में शिफ्ट किया।
भानपुर, दीपड़ी और मिसरोद में भी लोगों को सुरक्षित निकालकर शासकीय स्कूलों में शिफ्ट किया गया।
अंत्योदय नगर में नाले में बह रहे बैल को रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला।
वार्ड 33 स्थित ओमनगर में मकान की दीवार गिरने से बुजुर्ग बाबूराम शाक्य घायल हुए।
एमपी नगर में मैदा मिल के पास बिजली का खंभा झुक गया, जिससे हादसे की आशंका बनी हुई है।
वार्ड 74 में रेल कोच फैक्ट्री के पास करारिया फार्म क्षेत्र में जलभराव।
कोलार के दामखेड़ा बी सेक्टर में अलर्ट पर रहा अमला

उधर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा राहुल नगर, नया बसेरा बस्ती में जलभराव की स्थिति देखने पहुंचे। यहां उन्होंने रहवासियों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए।

हलाली डैम में बढ़ा पानी, 11 गांव के खेत डूबे

हलाली डैम का जल स्तर बढऩे से समीप के गांवों बरोड़ी, पीपलखेड़ी, रोनझिया, चार पहाड़ी, बर्री, बूदोर, खेजड़ा बब्बर, बगराज, ऊंटखेड़ा, पिपलिया, भेंसखेड़ा के खेतों में पानी भर गया। इससे सोयाबीन व मक्का की फसलों को नुकसान पहुंचा है। सोमवार को सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और बैरसिया विधायक विष्णु खत्री इन गांव में पहुंचे और ग्रामीणों की शिकायतें सुनीं। जिला प्रशासन के मुताबिक जल्द सर्वे कराया जाएगा।

शहर में 22 लो-लाइन विकसित, थोड़ी बारिश में डूब रहीं बस्तियां
भोपाल.भोपाल मास्टर प्लान 2005 में तय लो-लाइन एरिया का शहर विकास की एजेंसियों ने ध्यान नहीं रखा। शहर में 22 लो-लाइन एरिया अधिक घनत्व वाले क्षेत्र के रूप में विकसित हो गए हैं। इसका ही नतीजा है कि कलियासोत डैम के गेट खुलें या फिर नाले उफान पर आएं, बाढ़ के हालात बन जाते हैं।


निर्माणों की शिफ्टिंग की ठोस प्लानिंग हो
एक्सपर्ट्स का कहना है कि मास्टर प्लान 2031 के ड्राफ्ट में इन लो-लाइन एरिया के निर्माणों की शिफ्टिंग की ठोस प्लानिंग हो। लो-लाइन एरिया को ग्रीनरी से कवर किया जाए तो शहर के सौंदर्य और बारिश-बाढ़ में आपदा से बचा जा सकेगा। रिटायर्ड टाउन प्लानर दिनेश शर्मा का कहना है कि नालों के चैनेलाइजेश का काम इस बार होने से मुख्य क्षेत्रों में अधिक दिक्कत नहीं रही। लो-लाइन में तभी राहत होगी, जब मानवीय गतिविधियां प्रतिबंधित कर ग्रीनरी विकसित की जाए।


वरना कई बस्तियां डूब जाएंगी
सर्वधर्म-दामखेड़ा कोलार: कलियासोत डैम के दो से तीन गेट खुलने पर स्थिति ठीक रहती है, लेकिन चार से पांच गेट खुलने पर लोगों को शिफ्ट करना पड़ता है। डैम के कुल 13 गेट हैं। यदि सभी के खुलने की स्थिति बने तो एक बड़ा हिस्सा खाली कराना होगा वरना कई बस्तियां डूब जाएंगी।

सघन आबादी और बड़ा व्यवसायिक क्षेत्र बन गया
चूनाभट्टी, शाहपुरा सी सेक्टर: ये भी कलियासोत डैम का लो-लाइन एरिया है। मास्टर प्लान में इसे लो-डेंसिटी रखने का प्रावधान किया गया है। ताकि कलियासोत डैम के साथ कोई दुर्घटना हो तो आबादी को नुकसान न हो। अभी ये सघन आबादी और बड़ा व्यवसायिक क्षेत्र बन गया।

नाले के तल तक बने घरों में जलभराव होता है

बाणगंगा: श्यामला हिल्स के इस निचले क्षेत्र की बड़ी जमीन छोटे झाड़ के जंगल और लो-डेंसिटी के तौर पर तय है। स्थिति ये है कि बीते सालों में सबसे अधिक अतिक्रमण यहीं हुआ। यहां पूरा बाणगंगा क्षेत्र विकसित हो गया। हर साल बारिश में नाले के तल तक बने घरों में जलभराव होता है।


यहां जलभराव की स्थित बनती है
नई बस्ती, भदभदा: ये बड़ा तालाब के एफटीएल के समीप है। यहां मास्टर प्लान ने निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन नई बस्ती के नाम पर बड़ा स्लम एरिया विकसित हो गया। नेहरू नगर, कोटरा-सुल्तानाबाद की और से आने वाले नालों से यहां जलभराव की स्थित बनती है।

नालों के निर्माण और जल निकासी के लिए काफी काम हुए जिससे जलभराव की स्थिति नहीं बनी। लो-लाइन को लेकर दिक्कत जरूर है। इसे कैसे हल करें, इस पर संबंधितों के साथ योजना बनाई जाएगी।
आलोक शर्मा, महापौर

बावडिय़ा क्रॉसिंग का कंट्रोल रूम डूबा, मैन्युअली कर रहे ऑपरेट
हबीबगंज और मिसरोद रेलवे स्टेशन के बीच पडऩे वाले बावडिय़ाकलां रेलवे क्रॉसिंग के कंट्रोल रूम में सोमवार शाम पानी भर गया। इसे मैन्युअली ऑपरेट करना पड़ा। शाम साढ़े सात बजे क्रॉसिंग को कर्मचारियों ने ऑटोमैटिक बटन से खोलने का प्रयास किया, तो वह नहीं खुला। इसके बाद रेल प्रशासन को सूचना दी गई। भोपाल रेल मंडल के प्रवक्ता आईए सिद्दीकी का कहना है कि सुधार कार्य चल रहा है, इसके बाद ऑटोमेटिक सिस्टम शुरू हो जाएगा। ऑटोमैटिक सिस्टम भले ही खराब हुआ हो, लेकिन ट्रेनों के संचालन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। बता दें, इस रेलवे क्रॉसिंग पर पीक ऑवर्स में बहुत ट्रैफिक होता है। इस वजह से वाहन चालकों को लंबी-लंबी लाइनें लगाकर गेट के खुलने का इंतजार करना पड़ता है।


कलियासोत नदी में पानी बढ़ा तो डूब में आ जाएंगी कई कॉलोनियां
ये घर 33 मीटर के ग्रीन बेल्ट नहीं बल्कि रिवर बेड में बने हैं... हमने याचिका लगाते समय आगाह किया था, कलियासोत नदी वास्तविक आकार में बहेगी तो रहवासी संकट में आ जाएंगे। आज की स्थिति इसी ओर इशारा कर रही है। यह बातें कलियासोत नदी के किनारे अवैध निर्माण को लेकर एनजीटी में याचिका लगाने वाले डॉ. सुभाष सी. पांडेय ने सोमवार को उन्हीं स्थानों का दौरा करते हुए कहीं। डॉ. पांडेय ने पत्रिका के साथ दो घंटे तक कलियासोत डैम से सलैया गांव तक उफनती नदी के किनारों का जायजा लेकर भविष्य के खतरों को लेकर आगाह किया।


विकसित करने पौधारोपण का आदेश दिया था
डॉ. पांडेय ने मई 2014 में कलियासोत नदी के अतिक्रमण हटाने एनजीटी में याचिका लगाई थी। एनजीटी के निर्देश पर 20 अगस्त 2015 को नदी की तलहटी से दोनों ओर 33 मीटर तक क्षेत्र का सीमांकन और चिह्नांकन करके मुनारें लगाई गई थीं। इसे ग्रीन बेल्ट के रूप विकसित करने पौधारोपण का आदेश दिया था। तब 20 बड़े अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे।

जान जोखिम में डालकर रह रहे लोग
कलियासोत डैम के छह गेट खुले हुए थे। इसके बाद कलियासोत नदी के किनारे-किनारे दामखेड़ा में पहुंचे तो यहां पानी बस्ती के घरों से छूकर बह रहा था। इसके बावजूद सैकड़ों लोग अपनी जान जोखिम में डाल रह रहे थे। सर्वधर्म पुल के पास कलियासोत नदी किनारे बने घरों को छूते हुए बह रही थी।



मल्टीस्टोरी की रिटेनिंग वॉल ने रोक रखा पानी
कोलार से दानिश कुंज जाने वाले रोड पर मल्टीस्टोरी बिल्डिंग के पास से कलियासोत नदी बहती नजर आई। पार्किंग में लगा कलियासोत नदी के 33 मीटर का पत्थर सारी कहानी खुद कह रहा था। डॉ. पांडे ने बताया कि नदी बेड पाटकर सीमेंट की रिटेनिंग वॉल बनाकर पानी को रोक लिया है।

जीवन खतरे में पड़ा जाएगा
जब भी कलियासोत डैम के सभी 13 गेट खोलने की नौबत आई तो पानी न केवल यहां से ऊपर चढ़ जाएगा बल्कि नदी के वास्तविक स्वरूप में आते ही फ्लैट में रहने वाले हजारों लोगों का जीवन खतरे में पड़ा जाएगा। कलियासोत के नए पुल के पास भी नपाई का पत्थर मल्टीस्टोरी के गेट के सामने लगा मिला। यहां भी नदी बेड को पाटकर पानी का रास्ता बदला गया है। कलियासोत में पानी बढऩे पर यहां तक पानी नहीं पहुंचेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है।