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भोपाल स्टेशन पर जब महात्मा गांधी ने एक बच्ची को दे दी थी अंगूठी

अक्टूबर को इंडिया महात्मा गांधी का जन्म दिन धूमधाम से मनाता है। जबकि दुनियाभर में ये दिन इंटरनेशनल डे फॉर नॉन व्वॉयलेंस के रूप में मनाया जाता है।

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Anwar Khan

Oct 02, 2016

Mahatma gandhi, 2 october, birth anniversary

Mahatma gandhi, 2 october, birth anniversary

भोपाल। आज 2 अक्टूबर है। यानी इंडिया के राष्ट्रपिता (फादर ऑफ नेशन) महात्मा गांधी का जन्म दिन। पूरा देश बापू को अपने श्रद्धासुमन अर्पित कर रहा है। बापू मर्म स्पर्शी थे। अहिंसा के प्रति उन्होंने पूरी दुनिया में अलख जगाई। जब अहिंसा का आंदोलन अपने चरम पर था, उस वक्त बापू ने देशभ्रमण किया था। इस भ्रमण के दौरान बापू भोपाल भी आए थे। बात 1933 की है, जब बापू के भोपाल रेलवे स्टेशन पर पहुंचने की सूचना भोपाल शहर के लोगों को हुई, उसके बाद रेलवे स्टेशन पर जो जन हुजूम उमड़ा, वो वाकई बापू के प्रति लोगों के प्यार को बयां कर रहा था। उस समय की कुछ तस्वीरें हैं, जो आज भी उन यादों को जीवंत कर देती हैं। जब बापू स्टेशन पर उतरे थे तो उस वक्त एक घटना हुई थी। आइए हम बताते हैं उस घटना के बारे में....




Mahatma gandhi


बापू के चुनिंदा किस्सों में शामिल
सन् 1933 में हरिजन यात्रा के दौरान महात्मा गांधी ने पूरे देश में अनेक स्थानों की यात्रा की। इस यात्रा के बीच ट्रेन बदलने हेतु बापू कुछ समय के लिए भोपाल रेलवे स्टेशन पर रुके। प्रभात फेरी वालों से इसका समाचार शहर भर में फैल गया तथा भोपाल के लोग वहां बड़ी संख्या में एकत्रित हो गए। बापू ने वहां उन्हें न केवल संबोधित करा, बल्कि दान की भी अपील करी। इसी क्रम में एक छोटी बालिका की अंगूठी दान देने का भी दिलचस्प प्रसंग हुआ जो महात्मा गांधी के जीवन से जुड़े 150 रोचक प्रसंग के संकलन में भी शामिल किया गया है। दरअसल इस बच्ची के मासूम मुस्कान ने बापू का दिल पिघला दिया था।


2 october


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Mahatma gandhi

नवाबों के घर रहे, पर एक भी फोटो नहीं मिली
इतिहासकारों को इस बात से हमेशा नाराजगी रही कि महात्मा गांधी भोपाल प्रवास के दौरान भोपाल के नवाबों के घर रुकते थे। उन्होंने 1929 और 1933 के भोपाल प्रवास के दौरान नवाब के घर ही वक्त बिताया। नवाबों के महलों में उनके मेहमानों की तस्वीरों की संख्या सैकड़ों में है, पर बापू के भोपाल प्रवास की एक भी तस्वीर इन महलों में नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि भोपाल रियासत में फोटोग्राफी की तमाम सुविधाएं होने के बावजूद महात्मा गांधी की एक भी तस्वीर नहीं खींची गई?

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