
इसके बाद ही ग्रामों को ओडीएफ प्लस का प्रमाणपत्र मिलेगा, स्वच्छ भारत मिशन की टीम लगी ओडीएफ प्लस में
भोपाल. राजधानी में नगर निगम सीमा से बाहर बसे 614 गांवों में से 20 ग्रामों को ओडीएफ प्लस का दर्जा देने के लिए स्वच्छ भारत मिशन की टीम काम रही है। इसके लिए स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण ) मप्र की तरफ से कुछ बिंदू तय किए गए हैं। जिसमें अब घर के आलावा आप जिन स्थानों पर उठते बैठते हैं वहां भी शौचालय होना जरूरी है। जैसे कई गांवों में बच्चों के स्कूल संचालित होते हैं, लेकिन उनमें शौचालय नहीं है। ओडीएफ प्लस का तमगा पाने के लिए स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, पंचायत भवन में शौचालय/ सामुदायिक शौचालय की सुविधा होना जरूरी है। गांव की आबादी 500 से कम है और उसमें सौ से ज्यादा घर हैं तो वहां पर सामुदायिक स्वच्छता परिसर का होना जरूरी है। जैविक कचरे और ग्रे वॉटर (घर का गंदा पानी ) बाहर न फैले इसके पर्याप्त इंतजाम होना जरूरी है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए एक क्रियाशील प्रणाली हो। ऐसा नहीं कि सिर्फ दिखावे के लिए काम हो रहा हो। बाकायदा सूखा और गीला कचरा अलग किया जाए। ग्राम के सभी सर्वाजनिक स्थल साफ सुथरे रहें। ऐसे ही कई बिंदुओं पर खरा उतरने के बाद टीम को 20 गांवों का चयन करना है।
दरअसल केंद्र सरकार और मप्र सरकार ने पहले गांवों को ओडीएफ किया। इसके तहत राजधानी सहित प्रदेश का कोई गांव ऐसा नहीं बचा जो ओडीएफ न कर दिया हो। अब ओडीएफ प्लस का तमगा ग्रामों को दिया जाना है। लेकिन इसके लिए सिर्फ घर नहीं। आम लोगों का जहां उठना बैठना है, उन स्थानों तक में शौचालय के साथ ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन करना है। ये स्वच्छ भारत मिशन टीम के समक्ष बड़ी चुनौती है। क्योंकि ऐसे 20 गांव तलाशने में उन्हें समय लग जाएगा। जिले के काफी गांवों में भी कई स्कूलों में शौचालय की व्यवस्था नहीं है। टीम को एक रिपोर्ट भी बनाकर देनी है। स्वच्छ भारत मिशन की टीम ने शनिवार को कढैया ब्राह्मण और दमीला गांव जाकर लोगों को इसके बारे में जानकारी दी और उनको कचरे के बारे में मोटिवेट किया।
वर्जन
अभी 20 गांवों को ओडीएफ प्लस घोषित करना है। इसके कई बिंदू हैं जिस पर काम करना है। उसके बाद प्रमाण पत्र दिया जाएगा। इसके लिए टीमें काम कर रही हैं।
विकास मिश्रा, सीईओ, जिला पंचायत, भोपाल
Published on:
05 Sept 2021 09:18 pm
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