
2020 तक देश के कुछ शहर होंगे डे जीरो
भोपाल। भोजपुर क्लब में सोच व संवाद द्वारा आयोजित 'बूंद-बूंद जिंदगी जीवन अमृत' कार्यक्रम आयोजित किया गया।(आर्कियोलॉजिस्ट)मीरा दास ने बताया कि विदिशा पानी के लिहाज से देश में समृद्ध स्थानों में से एक रहा। यहां ऐसे-ऐसे वॉटर रिजर्व मिले हैं जिससे पता चलता है कि बुद्धिस्ट के समय पानी के कई स्त्रोत और संरक्षित करने की व्यवस्था थी। यह व्यवस्था उदयगिरी और उसे आगे तक नजर आती है। चंद्गगुप्त के शासन में पांचवीं सदी में गंगा देवी की मूर्ति मिलती है जिससे पता चलता है कि पानी के लिए लोगों के मन में संवेदनशीलता का भाव बनाए रखने के लिए मूर्ति बनवाई गई ताकि लोग पानी को सहेजें।
प्रोफेसर डॉ. मधु वर्मा ने बताया कि न्यूयार्क शहर में पानी के लिए रिजर्व वायर बनाकर रखे गए हैं। जब बरसात होती है तो पानी पहाड़ों से बहकर इन रिजर्व वायर्स में आता है और खास बात यह है कि बिना किसी ट्रीटमेंट के वहीं पानी शहरवासियों को सप्लाई किया जाता है। इस तरह पानी का बेहतरीन व्यवस्था इस शहर ने बनाकर रखी है। भारत में भी ऐसा माना जा रहा है कि साल 2020 तक कुछ शहर डे जीरो होंगे जब नलों से एक बूंद पानी भी नहीं आएगा।
नई तकनीकों को करना होगा शामिल
पानी की बचत करने के लिए कई तरीके हैं, इस बीच टेक्नोलॉजी भी ऐसी आई है कि पानी की बचत की जा सकती है। नलों के लिए ऐसे नोजल आए हैं, जिससे पानी की सप्लाई इस तरह होती है कि कम पानी में काम हो जाता है। इस मौकै पर पर्पल-टर्टल द्वारा मिट्टी के गोले बांटे गए जिनके भीतर गुममोहर, नीम और फलदार पौधों के बीज थे। इस मिट्टी के गोलों को घर में या जंगल में डाल दें तो बारिश के दौरान इसमें से पौधे निकल आएंगे। इस मौके पर आरती अग्रवाल ने कविता सुनाई। रजनी उपाध्याय ने इंदौर से प्राची पांडे द्वारा पानी पर लिखी कविता का पाठ किया।
Updated on:
09 Jun 2019 07:44 am
Published on:
09 Jun 2019 07:43 am
