
26 देशों से आए एक्स स्टूडेंट्स ने लिया संकल्प, मैनिट को टॉप एनआईटी बनाने में करेंगे मदद
भोपाल । मिंटो हॉल में शनिवार को मैनिट के पहले ग्लोबल एलुमिनाई कन्वेंशन आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा मौजूद रहे। इसमें 26 देशों में रह रहे एक्स स्टूडेंट्स ने भाग लिया। इस मौके पर शर्मा ने कहा कि इंजीनियर स्टूडेंट हर जगह फिट और हिट रहता है। यदि सभी मिलकर कार्य करें, तो किसी भी क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकते हैं। पुराने साथियों से मिलकर नई ऊर्जा का संचार होता है। भोपाल का मैनिट संस्थान ऐसा संस्थान है, जहां पर अध्ययनरत रहे स्टूडेंट आज दुनिया के 65 देशों में अपने संस्थान और भोपाल के साथ पूरे देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
एक्स स्टूडेंट्स को किया सम्मानित
वहीं कार्यकम में मैनिट की स्टूडेंट रही हस्तियों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर नान कोर कैटेगरी में मैनिट के स्टूडेंट रहे और वर्तमान में महानिदेशक, अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान आर परशुराम को सम्मानित किया गया। कोर कैटेगरी में एक्स स्टूडेंट जॉन के. जॉन, संतोष चौबे और संजीव अग्रवाल भी सम्मानित हुए। कार्यक्रम में मैनिट एलुमिनी सेल द्वारा प्रकाशित की गई स्मारिका मेग्नम ओपस-2019 का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर कनाडा निवासी मैनिट एलुमिनी सेल की अध्यक्ष रागिनी आरवीआर, पूर्व विधायक शैलेन्द्र प्रधान, रिटायर्ड मेजर जनरल श्याम श्रीवास्तव, संजीव सक्सेना और प्रफुल्ल निलोसे आदि मौजूद थे।
पढ़ार्ई करोगे तो अच्छी बीवी मिलेगी कहकर टीचर कराते थे पढ़ाई
भोपाल के सिविल ब्रांच के 1978 बैच के दीपक कपूर ने बताया कि हम जब पढ़ते थे, तो एक प्रोफेसर हमेशा यहीं कहते थे कि अच्छा पढ़ोगे-लिखोगे तो एग्जाम में अच्छे नंबर आएंगे। अच्छे नंबर आएंगे तो अच्छी नौकरी के साथ अच्छी बीवी मिलेगी। यह कहकर पांच साल तक हमें पढ़ाते रहे।
पुरानी क्लासेस और दोस्तों को करता हूं मिस
गोवा से आए सिविलि ब्रांच के 1998 बैच के अमरूत सेवड़े ने बताया कि आज कई सालों बाद मैनिट कैंपस में आने का मौका मिला। यहां पहले से व्यवस्थाएं बहुत बदल गई। बहुत अच्छा लग रहा है, इसी के साथ अपनी क्लासेज के साथ पुराने दोस्तों को बहुत मिस कर रहा हूं।
थर्ड फ्लोर पर क्लास होने से मारते थे बंक
राजधानी के ही रहने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांच के 1976 बैच के आरडी सक्सेना ने बताया कि हमारी सब्जेक्ट की कुछ क्लासेज थर्ड फ्लोर पर लगती थी, जिस वजह से हम उस क्लास में इतनी ऊपर होने की वजह से कभी नहीं जाते थे।
अटेंडेंस देकर क्लास से भाग जाते थे
मैकेनिकल ब्रांच के 1978 बैच के सुरेश खियानी ने बताया कि जब कॉलेज से मैकेनिकल टूल टी लेकर बस से जाते थे, तो सभी बस वाले हम को बहुत सम्मान की दृष्टि से देखते थे। उस समय मैनिट में पढऩे वालों का रूतबा ही अलग था। जब हम लोग पड़ते थे तो उस समय कुछ क्लासेज बहुत बोर होती थी, लेकिन 75 प्रतिशत अटेंडेंस की वजह से हमको उसमें जाना पड़ता था, लेकिन हम लोग जैसे ही अंटेंडेस लगती थी, वैसे ही दूसरे गेट से क्लास से भाग जाते थे। टीचर्स भी हमें नहीं तलाश पाते थे।
Published on:
10 Feb 2019 02:14 pm
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