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10 देशों के 30 कलाकारों ने पेश की संगीत की साधना

ध्रुपद संस्थान में चल रहे तीन दिवसीय ध्रुपद उत्सव 'स्मरण' का समापन

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10 देशों के 30 कलाकारों ने पेश की संगीत की साधना

10 देशों के 30 कलाकारों ने पेश की संगीत की साधना

भोपाल। ध्रुपद संस्थान गुरुकुल की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर ध्रुपद उत्सव 'स्मरण' का समापन ध्रुपदांजलि के रूप में किया गया। समारोह के तीसरे दिन की तीन सभाओं में ध्रुपद गायन और वीणा वादन हुआ। पहली सभा का प्रारंभ लिटिल ध्रुपद सिंगर के गायन से हुआ।

इसके बाद मास्टर कुशाल ने राग मेघ में आलाप और बंदिश सुनाई, जिसके बोल प्रबल दल साज जग झूम जा भूमि पर... थे। उनके साथ पखावज पर ह्दयेश चोपड़ा ने संगत की। इसके बाद मुरली मोहन का वीणा वादन हुआ। उन्होंने वीणा पर राग भैरव में आलाप, जोड़, झाला प्रस्तुत किया और चौताल में एक बंदिश बजाई। उनके साथ पखावज पर रमेशचंद्र जोशी ने संगत की।

तीसरी कड़ी के रूप में जर्मनी की योगेश्वरी और लखनलाल साहू की ध्रुपद जुगलबंदी हुई। दोनों ने राग वृंदावनी सारंग में आलाप और ध्रुपद पेश किया। जिसे बोल गुरुप्रसाद नाथ के थे। उनके साथ पखावज पर रमेश चंद्र जोशी ने संगत की। वहीं, मनोहर हरवानी ने ध्रुपद गायन में राग भूपाली और राग जौनपुरी में आलाप व ध्रुपद पेश किया।

पहली सभा का समापन अफजल हुसैन के ध्रुपद गायन से हुआ। उन्होंने राग शुद्ध सारंग में आलाप और ध्रुवपद प्रस्तुत किया। जिसके बोल तुम हो नाथ सकल... थे। उनके साथ पखावज पर रोमन दास ने संगत की।

रघुवीर धीर अयोध्या नगर को...

समारोह की दूसरी सभा का प्रारंभ बेल्जियम की जया जूली के ध्रुपद गायन से हुआ। उन्होंने राग बागेश्री में आलाप और ध्रुपद पेश किया। जिसके बोल आए रघुवीर धीर अयोध्या नगर को... थे। डागर घराने के पंडित राजशेखर व्यास ने ध्रुपद पर कार्यशाला का संचालन किया। उन्होंने ध्रुपद की बारीकियों बानिया और ध्रुपद के 10 लक्षणों के बारे में चर्चा की। अंतिम संध्या में स्पेन के विक्टर और अर्जेंटीना के रिकॉर्डो ने ध्रुपद गायन की जुगलबंदी प्रस्तुत की।

उन्होंने राग भीमपलासी में आलाप जोड़ और झाला प्रस्तुत किया। वहीं, चौताल में बंदिश कुंजन में रचयो रास अद्भुत गत लिए गोपाल... सुनाई। लकी गुसैन ने राग भूपाली में आलाप जोड़ झाला और सूलताल में बंदिश शंकर सुत गणेश... की प्रस्तुति दी। इसके बाद बड़ौदा की अंजना अय्यर ने राग यमन में आलाप और धमार प्रस्तुत की।

उन्होंने केसर घोल के रंग बनो हैं... सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बांग्लादेश के नीलाय एहसान ने राग जोग में ध्रुपद प्रस्तुत किया। समारोह का समापन पद्मश्री पंडित गुंदेचा बंधुओं के ध्रुपद गायन से हुआ। उन्होंने राग अभोगी कांन्हड़ा में आलाप, जोड़, झाला प्रस्तुत किया। वहीं, सूलताल में रचना स्वर तत्व ज्ञान... पेश की। इनके साथ पखावज पर पंडित अखिलेश गुंदेचा ने संगत की।