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7th pay commission: 7वें वेतनमान पर आज की सबसे बड़ी खबर, इन कर्मचारियों को नहीं मिलेगा लाभ!

कैबिनेट में रखने से पहले इसे वित्त विभाग की मंजूरी के लिए भेजा गया, लेकिन विभाग की मंजूरी अब तक नहीं मिली।

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7th pay scale

भोपाल। सातवें वेतनमान का मामला कई स्तरों पर उलझा हुआ है, जो अभी तक सुलझता हुआ नहीं दिख रहा है। एक तरफ जहां 7th pay commission मंत्री कुछ कहते हैं वहीं उन्हीं का विभाग की ओर से लगातार की जा रही देरी संदेह पैदा कर रही है।

ऐसे ही एक मामले के चलते 35 हजार से ज्यादा मप्र के 378 नगरीय निकायों के कर्मचारियों को सातवां वेतनमान देने का प्रस्ताव अटक गया है। इसका प्रस्ताव नगरीय विकास विभाग ने वित्त विभाग के पास भेजा था, लेकिन अब तक वित्त विभाग ने इस पर मंजूरी नहीं दी है।

हालांकि वित्त विभाग का भी इसे लेकर दोहरा रवैया है। एक तरफ जहां विभाग प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ वित्त मंत्री जयंत मलैया ने विधानसभा में एक सवाल के दौरान जवाब में कहा था कि विभाग चाहे तो कर्मचारियों को सातवां वेतनमान दे सकता है।

दरअसल, वित्त विभाग ने सरकारी कर्मचारियों को सातवां वेतनमान देने के लिए वेतन पुनरीक्षण नियम में प्रावधान किया था कि मप्र नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 और मप्र नगर पालिक अधिनियम 1961 के नियंत्रण में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए सातवां वेतनमान लागू नहीं होगा। इस नियम में न्यायालयीन सेवा के व्यक्तियों को भी शामिल किया गया था, लेकिन बाद में न्यायालयीन सेवा के व्यक्तियों को भी सातवां वेतनमान देने का आदेश जारी हो गया।

करीब एक महीने पहले नगरीय विकास विभाग ने निकायों के कर्मचारियों को सातवां वेतनमान देने का फैसला करने के लिए कैबिनेट का प्रस्ताव बनाकर भेजा था। कैबिनेट में रखने से पहले इसे वित्त विभाग की मंजूरी के लिए भेजा गया, लेकिन विभाग की मंजूरी अब तक नहीं मिली। वित्त विभाग द्वारा जारी नियम कैबिनेट से पारित हुए थे, इसलिए प्रस्ताव को मंजूरी के लिए वित्त विभाग भेजा गया था।

इन पर आएगा बोझ
कर्मचारियों को सातवां वेतनमान नगरीय निकाय अपने बजट से ही देंगे, इसलिए सरकार पर इसका अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा। हालांकि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन जैसे बड़े नगर निगमों पर इसका ज्यादा बोझ आएगा, क्योंकि यहां कर्मचारियों की संख्या भी ज्यादा है।

वेतनमान देने, विभाग स्वतंत्र
वित्त मंत्री जयंत मलैया ने शीतकालीन सत्र में अतारांकित सवाल के जवाब में कहा था कि स्थानीय निकाय और निगम-मंडल के कर्मचारियों को सातवां वेतनमान देने का फैसला करने के लिए विभाग स्वतंत्र हैं।

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