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एमपी के 8 शहर ‘नॉन अटेनमेंट’ सिटी के दायरे में, सांस लेने में हो सकती दिक्कत

MP News: नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के अंतर्गत पीएम-10 (पर्टिकुलेट मैटर) के स्तर में 40 प्रतिशत तक कमी या 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर वार्षिक की उपलब्धि हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

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Non-Attainment Cities,

Non-Attainment Cities प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- freepik)

MP News: नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत वायु प्रदूषण के चलते प्रदेश के आठ शहरों को नॉन-अटेनमेंट सिटी के दायरे में रखा गया है। यहां प्रदूषण कम होने की जगह बढ़ता ही जा रहा है। ताजा रिपोर्ट में इंदौर और सागर में 2025 में पीएम-10 घटने की बजाय बढ़ गया। एनजीटी द्वारा गठित समिति ऐसे आठ शहर भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सागर, सिंगरौली और देवास में प्रदूषण कम करने का काम कर रही है।

सबसे ज्यादा जोर सड़कों की धूल और वाहनों का प्रदूषण कम करने पर है। यहां सड़कों की सफाई ब्लोअर की बजाय सक्शन वाली स्वीपिंग मशीनों से होगी। एनजीटी ने राशिद नूर खान की याचिका पर नगरीय विकास, परिवहन, पर्यावरण विशेषज्ञ आदि को शामिल कर एक समिति गठित की थी। समिति ने कई स्थानों का निरीक्षण और अपनी सिफारिशें एनजीटी को सौंपी है। भोपाल में सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी संस्थान पुणे के विशेषज्ञों की भी मदद ली गई। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के अंतर्गत पीएम-10 (पर्टिकुलेट मैटर) के स्तर में 40 प्रतिशत तक कमी या 60 माइक्रोग्राम प्रति ऋयूबिक मीटर वार्षिक की उपलब्धि हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

समिति ने यह दिए सुझाव

  • रोड डस्ट एवं वाहनों के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नगरीय प्रशासन और परिवहन विभाग सख्ती से काम करें।
  • भोपाल की सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी में चिह्नित किए गए 21 हॉट स्पॉट का जल्द निरीक्षण करें।
  • सड़कों की लीनिंग आउटर लेन पर करते हुए फुटपाथ एवं किनारों पर एंड-टू-एंड पेविंग ब्लॉक लगाए जाएं।
  • सड़क के दोनों तरफ फुटपाथों पर एक निर्धारित चौंड़ाई तक पेवर्स ब्लॉक लगाने के साथ उसकी आधी चौड़ाई में घास की कार्पेट व ऐसे पौधे लगाएं जिसकी कैनोपी घनी व बायोमास ज्यादा हो।
  • शहरों में वायु गुणवत्ता सतत निगरानी के लिए मॉनीटरिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाई जाए।
  • शहरों के ग्रेडेड रेस्पॉन्स एशन प्लान और लॉन्ग टर्म एक्शन प्लान बनाने के लिए जिला स्तरीय समिति के सदस्यों के साथ मिलकर कार्यवाही की जाएगी।

समिति में यह शामिल

समिति में डॉ. रवि प्रकाश मिश्रा, अपर आयुक्त नगरीय प्रशासन शिशिर गेमावत, उप आयुक्त परिवहन किरण शर्मा, वैज्ञानिक-ई डॉ. सत्या, एप्को से डॉ. सुब्रता पाणी, एमपीपीसीबी से पीसी उचारिया शामिल हैं। वाहन प्रदूषण रोकने में नगरीय प्रशासन के अलावा टाउन एण्ड कंट्री प्लानिंग, परिवहन विभाग के साथ ट्रैफिक पुलिस की भी जवाबदेही तय होगी।

क्या है नॉन-अटेनमेंट सिटी

नॉन-अटेनमेंट सिटी ऐसे शहर होते हैं जो लगातार कई सालों (आमतौर पर 5 साल से ज्यादा) से राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं कर पाते हैं। वहां प्रदूषण कम करने के लिए विशेष कार्य योजनाएं बनती हैं।

पीएम 10: ऐसे कण जिनका व्यास 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये धूल, मिट्टी, सीमेंट, परागकण आदि से बनते हैं। ये कण नाक और गले तक आसानी से पहुंच जाते हैं।

पीएम 2.5: इसका मतलब है ऐसे कण जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये बहुत ही सूक्ष्म होते हैं। बाल की मोटाई से लगभग 30 गुना छोटे। ये फेफड़ों में पहुंचकर गंभीर बीमारी का कारण बनते हैं।

स्वास्थ पर पड़ता है ये असर

  • सांस लेने में दिक्कत
  • अस्थमा और एलर्जी
  • दिल और फेफड़ों की बीमारियां
  • लंबे समय में कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है