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एमपी में ’96 अवैध निर्माण’ चिह्नित, 58 झुग्गियां, 7 मंदिर, 5 रेस्टोरेंट शामिल

MP News: भोपाल विकास योजना 2005 के अनुसार, दोनों जलाशयों के आसपास लगभग 150 हेक्टेयर क्षेत्र को बॉटनिकल गार्डन और रीजनल पार्क के रूप में आरक्षित किया गया है।

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Illegal Structures

Illegal Structures प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)

MP News: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सेंट्रल जोन बेंच ने शहर के प्रमुख जलस्रोत कलियासोत और केरवा जलाशयों के संरक्षण को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इन जलाशयों के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) और जलग्रहण क्षेत्रों (कैचमेंट एरिया) में हो रहे अतिक्रमण और व्यावसायिक गतिविधियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। जस्टिस दिनेश कुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी की बेंच ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इन क्षेत्रों का सटीक सीमांकन कर अवैध निर्माणों को हटाया जाए।

7 अप्रैल तय की है...

भोपाल विकास योजना 2005 के अनुसार, दोनों जलाशयों के आसपास लगभग 150 हेक्टेयर क्षेत्र को बॉटनिकल गार्डन और रीजनल पार्क के रूप में आरक्षित किया गया है। कोर्ट ने कलेक्टर भोपाल और नगर एवं ग्राम निवेश विभाग को इस भूमि का सीमांकन जल्द पूरा करने को कहा है। एनजीटी ने सुनवाई की तारीख सात अप्रेल तय की है और राज्य सरकार से अतिक्रमण हटाने की पृथक और विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

22 प्रशासन द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में कुल 96 अवैध निर्माणों की पहचान की गई है। इनमें से 84 सरकारी भूमि पर और 12 निजी भूमि पर पाए गए हैं। चिन्हित संरचनाओं में 58 झुग्गियां, 15 डेयरी, सात मंदिर, पांच रेस्टोरेंट और अन्य निर्माण शामिल हैं। अब तक 28 अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं और शेष को खाली करने के लिए बेदखली वारंट जारी किए गए हैं।

खेती और रसायनों के उपयोग पर चिंता

आवेदक डॉ. सुभाष सी. पांडेय ने जलाशयों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग कर कृषि गतिविधियां की जा रही हैं। ट्रिब्यूनल ने इसे जनस्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक बताते हुए जल संसाधन विभाग को मौके पर सत्यापन कर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। 150 हेक्टेयर में बनेगा बॉटनिकल गार्डन।

निगम-रेलवे को फटकार

एनजीटी ने भोपाल जंक्शन और उसके आसपास के क्षेत्रों में भारी मात्रा में जमा ठोस और प्लास्टिक कचरे पर कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी ने रेलवे और ननि सहित अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस दिया है। जस्टिस दिनेश कुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी की बेंच 21 अप्रेल को अगली सुनवाई करेगी। शिवम कुमार कोरी व अन्य की याचिका में बताया गया, रेलवे भूमि, पटरियों के किनारे और ड्रेनेज चैनलों व नालों में ह्रश्वलास्टिक और नगरपालिका अपशिष्ट के साथ-साथ खतरनाक कचरा भी फेंका जा रहा है।