
भोपाल। रवीन्द्र सभागम केंद्र में नाटक ' चंद्रशेखर आजाद' का मंचन हुआ। एक घंटा 20 मिनट के नाटक का निर्देशन शोभा चटर्जी ने किया है। इसमें 18 कलाकारों ने ऑनस्टेज अभिनय किया। डायरेक्टर ने बताया कि मैंने और मेरे पति आलोक चटर्जी ने जब आजाद पर नाटक तैयार करने का निर्णय लिया तो हमने देखा कि इस महान क्रांतिकारी पर कोई स्क्रिप्ट पहले लिखी ही नहीं गई। हमने प्रसंगों को जोड़कर उसे एक कहानी का रूप दिया। इसमें आजाद के बचपन से लेकर अल्फ्रेड पार्क तक की पूरी कहानी को शामिल किया गया।
लोग सिर्फ मूछों और रिवाल्वर वाले आजाद को ही जानते है
काकोरी कांड, क्रांति का इतिहास जैसी किताबों से अंश लेकर कहानी तैयार की गई। उनकी बायोग्राफी से प्रसंगों को भी सीन बनाया। लोग सिर्फ मूछों और रिवाल्वर वाले आजाद को ही जानते है लेकिन हमने इसमें अन्य कहानियों को भी जोड़ा। नाटक में ओरछा में सुरंग में छिपकर रहना, लूट के दौरान एक महिला के पिस्तौल छीनने और दोस्तों ने च्वनप्राश खिलाकर आजाद का पेट खराब करने के दृश्य भी दिखाए गए। नाटक में दर्शकों को दिसंबर 1921 गांधीजी के असहयोग आंदोलन का दौर नजर आता है, जिसमें 14 वर्ष की उम्र में बालक चंद्रशेखर ने इस आंदोलन में भाग लिया था। चंद्रशेखर को गिरफ्तार कर मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित किया जाता है। चंद्रशेखर से उनका नाम पूछा गया तो उन्होंने अपना नाम आजाद, पिता का नाम स्वतंत्रता और घर जेलखाना बताया। जज उन्हें अल्पायु होने के कारण कारागार का दंड न देकर 15 कोड़े देने की सजा सुनाते हैं। आजाद हर कोड़े पर वंदेमातरम और भारत माता की जय... नारा लगाते हैं।
Published on:
23 Jul 2022 09:43 pm
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