
MP News: मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में एक अनोखा गांव है। जहां हर घर में संस्कृत बोली जाती है। यहां सुबह की शुरुआत "गुड मॉर्निंग" से नहीं, बल्कि नमो-नम: से होती है। ऐसा नहीं है कि इस गांव के लोग सिर्फ संस्कृत बोलते हैं, बल्कि इस गांव के घरों के नाम भी संस्कृत में हैं। जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर झिरी गांव में बोलचाल की भाषा में संस्कृत ही बोली जाती है।
महिलाएं, बच्चे और दुकानदार सभी बोलते है संस्कृत
इस गांव में दुकानदार, किसान, महिलाएं और बच्चे सभी संस्कृत बोलते हैं। गाँव के स्कूलों में मुख्य भाषा के रूप में संस्कृत पढ़ाई जाती है। झिरी गांव की आबादी 1500 से ज्यादा है। गाँव की महिलाएँ, पुरुष, दुकानदार और बच्चे एक दुसरे से केवल संस्कृत में ही बात करते हैं। गाँव के स्कूलों में भी केवल संस्कृत ही पढ़ाई जाती है।
कैसे शुरू हुआ
1980 के दशक में विमला तिवारी नाम की एक सामाजिक कार्यकर्ता ने इस गांव में संस्कृत को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया था। विमला तिवारी ने संस्कृत कक्षाएं शुरू कीं और लोगों को संस्कृत बोलने के लिए प्रोत्साहित किया। धीरे-धीरे गांव का हर व्यक्ति संस्कृत भाषा में बात करने लगा। धीरे-धीरे, संस्कृत इस गांव की मूल भाषा ही बन गई।
देश के दो गांव में ही बोली जाती है संस्कृत
देश में केवल दो गांव ऐसे हैं जहां सामान्य बोलचाल की भाषा संस्कृत है। कर्नाटक में शिवमोग्गा के पास मत्तूर गाँव में भी संस्कृत का उपयोग किया जाता है और दूसरा गाँव मध्य प्रदेश में झिरी गाँव है। राजगढ़ जिले के झिरी गांव में भी संस्कृत बोली जाती है। देश में ये दो गांव रोल मॉडल बन गए हैं।
घरों का नाम भी संस्कृत में
खास बात यह है कि राजगढ़ जिले के जिरी गांव में ग्रामीण अपने घरों के नाम संस्कृत में रखते हैं। इस गांव के अधिकांश घरों पर संस्कृत शब्द गृहम् लिखा हुआ है। कहा जाता है कि इस गांव के बच्चों को स्कूलों के अलावा मंदिरों और गांव के स्कूलों में भी संस्कृत की शिक्षा दी जाती है। सबसे खास बात ये है कि शादी के दौरान महिलाएं संस्कृत में ही गाना गाती हैं।
Updated on:
24 Feb 2024 01:14 pm
Published on:
24 Feb 2024 01:13 pm
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