केजरीवाल की रैली से भले ही पार्टी को त्वरित बहुत ज्यादा लाभ न मिले, लेकिन पार्टी इस रैली के जरिये प्रदेशभर में अपनी उपस्थिति का एक मजबूत सन्देश तो दे ही देगी। केजरीवाल की रैली के जरिए प्रदेश में 'आप' 2018 के विधानसभा चुनाव में खुद को मजबूत विकल्प के तौर पर पेश करने की कोशिश करेगी। हालांकि, अभी पार्टी संगठन के तौर पर कांग्रेस और बीजेपी के मुकाबले बेहद कमजोर है, लेकिन यदि पार्टी ऐसे ही माहौल बनाती रही तो एक दिन मध्यप्रदेश की राजनीति में 'आप' का भी चेहरा नजर आ सकता है।