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20 को भोपाल में रैली करेंगे केजरीवाल, दावा ‘शिवराज’ होंगे एक्सपोज

मंगलवार को पार्टी के मुखिया अरविन्द केजरीवाल भोपाल में एक आम जनसभा को संबोधित करने वाले हैं। पार्टी का दावा है कि केजरीवाल इस सभा में वो शिवराज सरकार को बिजली के मुद्दे पर एक्सपोज करेंगे।

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gaurav nauriyal

Dec 17, 2016

arvind kejriwal

arvind kejriwal

भोपाल. आम आदमी पार्टी (आप) 2018 में मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से खासी सक्रिय होती नजर आ रही है। इसी कड़ी में मंगलवार को पार्टी के मुखिया अरविन्द केजरीवाल भोपाल में एक आम जनसभा को संबोधित करने वाले हैं।

पार्टी का दावा है कि केजरीवाल इस सभा में शिवराज सरकार को बिजली के मुद्दे पर एक्सपोज करेंगे। इतना ही नहीं पार्टी का यह भी कहना है कि सर्कार के भ्रष्टाचार के खिलाफ पार्टी के पास पुख्ता प्रमाण भी हैं। इसके अलावा अरविन्द नोटबंदी के मुद्दे पर भी अपनी बात रैली में रखेंगे।

मध्यप्रदेश में अपनी जमीन तलाश रही 'आप' धीरे-धीरे ही सही लेकिन खुद को जनता के सामने एक 'विकल्प' के तौर पर पेश करने के लिए जद्दोजहद करती नजर आ रही है। पार्टी के वॉलेंटियर्स इन दिनों 'आप' की रैली को लेकर सक्रिय हैं। इतना ही नहीं रैली की तैयारियों को लेकर कार्यकर्ता सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक पर सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।

सरकार के खिलाफ है 'पक्के' सुबूत
पार्टी का कहना है कि उनके पास शिवराज सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं, जिसका खुलासा अरविन्द केजरीवाल जनसभा में ही करेंगे। इतना ही नहीं आप का यह भी दावा है कि केजरीवाल शिवराज सरकार को लेकर कई और चौंकाने वाले खुलासे भी करेंगे। माना जा रहा है कि अरविन्द व्यापमं घोटाले और हाल ही में हुए जेल ब्रेक कांड को लेकर भी सरकार का घेराव कर सकते हैं। इस रैली में केजरीवाल के अलावा पार्टी के सीनियर लीडर गोपाल राय भी मौजूद रहेंगे।

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'आप' की पॉलिटिक्स के नेचर में फिट है एमपी
आम आदमी पार्टी मुद्दों को आक्रामक ढंग से रखने के साथ ही राजनीतिक दलों के घोटालों को एक्सपोज करने की राजनीति करती आई है। दिल्ली में पार्टी ने इसी लाइन पर चलकर अपनी सरकार बनाई थी और यही रणनीति पंजाब और उत्तरप्रदेश के चुनावों में भी देखने को मिल रही है। इस लिहाज से भी देखें तो मध्यप्रदेश 'आप' के नेचर की पॉलिटिक्स में फिट बैठता है। व्यापमं और जेल ब्रेक कांड के अलावा कई मामलों में कांग्रेस, शिवराज सरकार को घेरने में नाकाम साबित हुई है।

...तो कांग्रेस दे रही जमीन
मध्यप्रदेश को लेकर ये बात कांग्रेस भी भली भाँती जानती है कि पार्टी की खेमेबंदी का खामियाजा चुनाव परिणाम के वक़्त देखने को मिलते हैं। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व इन मसलों पर चुप्पी साधे हुए बैठा है। प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति का अंदाज़ा पिछले उपचुनावों के नतीजों को देखकर भी समझ आ जाता है। हाल ही में नेपानगर और शहडोल में हुए उपचुनाव में पार्टी को खेमेबंदी के चलते मुंह की खानी पड़ी थी। ऐसे में यदि 'आप' बूथ स्तर तक संगठन की जडें पसारने में कामयाब होता है तो, इसका सीधा नुकसान कांग्रेस को ही होने वाला है।

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सोशल मीडिया और फ़्लैश मॉब
पार्टी के पदाधिकारी लोगों को रैली के बारे में बताने के लिए पारंपरिक प्रचार के तरीकों के अलावा 'फ़्लैश मॉब' और सोशल मीडिया का भी सहारा ले रहे हैं। पिछले दिनों #Donate2AapMP हैशटैग ट्विटर पर ट्रेंड भी करता रहा था। पार्टी इस मुहिम के जरिये एके की रैली के लिए फंड रेजिंग का कार्य कर रही थी। पार्टी को इस मुहिम से तकरीबन 2 लाख रूपए का चंदा भी मिला। इसपर पार्टी के पदाधिकारियों का कहना था कि ये मध्य प्रदेश में शुरुआत भर है।

...आगे क्या
केजरीवाल की रैली से भले ही पार्टी को त्वरित बहुत ज्यादा लाभ न मिले, लेकिन पार्टी इस रैली के जरिये प्रदेशभर में अपनी उपस्थिति का एक मजबूत सन्देश तो दे ही देगी। केजरीवाल की रैली के जरिए प्रदेश में 'आप' 2018 के विधानसभा चुनाव में खुद को मजबूत विकल्प के तौर पर पेश करने की कोशिश करेगी। हालांकि, अभी पार्टी संगठन के तौर पर कांग्रेस और बीजेपी के मुकाबले बेहद कमजोर है, लेकिन यदि पार्टी ऐसे ही माहौल बनाती रही तो एक दिन मध्यप्रदेश की राजनीति में 'आप' का भी चेहरा नजर आ सकता है।

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