
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय
कार्यकर्ताओं का यह धरना प्रदर्शन देर रात तक जारी रहा। अभाविप का कहना है कि शासन जब तक उनकी मांग नहीं मानता है, तब तक यह अनिश्चितकाल धरना जारी रहेगा। अभाविप की राष्ट्रीय मंत्री शालनी वर्मा का कहना है कि निजी खाते में करोड़ों रुपए का ट्रांजेक्शन कर आरजीपीवी विश्वविद्यालय ने छात्रों का पैसा हजम करने का नया मार्ग बनाया है।
इस पूरे प्रकरण को छुपाने के लिए निजी खाते को आरजीपीवी का खाता बताया है। अभाविप उच्च शिक्षा मंत्री से यह मांग करती है। प्रकरण संबंधित दोषी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करें।
-बाहरी एजेंसी से जांच कराने की मांग
संदीप वैष्णव का कहना है कि इस भ्रष्टाचार की बाहरी एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच कराना चाहिए। जांच प्रभावित न हो एवं उसकी पारदर्शिता बनी रहे इसलिए जांच पूरी होने तक कुलपति को तुरंत प्रभाव से छुट्टी पर भेजा जाए।
यह है पूरा मामला
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में छात्रों के करोड़ों रुपए के चेक एफ डी कराने के नाम पर हेरफेर कर निजी व्यक्ति के खाते में डाल दिए गए। यह चेक संस्थान के रजिस्ट्रार और कंट्रोलर फाइनेंस के हस्ताक्षर से जारी किए गए। फर्जीवाड़ा पकड़ में न आए इसलिए संस्थान के दस्तावेजों में चेक में खाता नंबर तो वही दिखाया, जिसमें पैसा गया, लेकिन इस खाते को आरजीपीवी का बताया गया। पूरे फर्जीवाड़े का पैसा कुमार मयंक नामक जिस व्यक्ति के खाते में गया, वह आरबीएल में रीजनल मैनेजर था। हेरफेर इस कदर की गई कि आरजीपीवी जिस खाते को आरबीएल में अपना बता रहा है, वह खाता कुमार मयंक के नाम पर एक्सिस बैंक में है।
Published on:
19 Feb 2024 10:50 pm
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