19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मुश्किल वक्त में दोस्तों से हेल्प मांगनी चाहिए, तब पता चलता है कि कौन अपने दोस्त हैं कौन नहीं- कबीर बेदी

जब हम किसी मुसीबत में होते हैं तो हमें दूसरे की हेल्प मांगनी चाहिए, बेशक ये सेल्फ रैसपेक्ट के लिए मुश्किन होता है। पर इससे पता चलता है कि कौन अपका दोस्त हैं और कौन नहीं है।

2 min read
Google source verification

भोपाल

image

Anjali Tomar

Jan 15, 2023

kabeer_bedi.jpg

kabeer bedi

भोपाल- कबीर बेदी ने कहा कि मैंने अपने जीवन में ह्यूमन वैल्यू को हमेशा सेंटर में रखा जो बुद्धिज्म और हिंदुज्म के बेसिक है, लेकिन मेरी असली सोच क्या है, कहां से आये, कैसी यह दुनिया बनी। यह सब मेरी किताब में रखा है। मेरी जिंदगी में बहुत सी जीते भी है त्रासदी भी है। दोनों सफलता और फैलियर हमें दोनों की मदद मांगनी चाहिए। क्योंकि सफलता के अपने चुनौति होती है। जब हम मुश्किल में दूसरों से मदद मांगना मुश्किल चीज है। डिग्निटी की बात होगी।

लेकिन उस वक्त आपको पता चल जाता है कि असली दोस्त कौन है और नकली दोस्त कौन है। कुछ ऐसे वक्त भी आये कि इटली के ट्रांस के बाद एक समय आया जब मैंने ट्रेजडी फैस की और मुझे दूसरों की सहायता मांगनी पड़ी इसका जिक्र मैंने किताब में किया है। मैं मानता हूं कि मेडिटेशन हर एक के लिए जरूरी है बहुत शांति भी देती है हौंसला भी देता है और सहने की ताकत देता है। मेडिटेशन सिम्पल और इफेक्टिव टेक्निक है। यह स्वीकार करना होगा आप किस तरह का मेडिटेशन करते हैं आप पर निर्भर करता है मैं विपश्यना को फॉलो करता हूं।

बुक की जर्नी को किया शेयर

कबीर बेदी ने अपनी बुक की जर्नी के बारे में बताते हुए कहा कि वे इसके लिए वर्षों से खोज कर रहे थे। इसके लिए उन्होंने ओशो, दलाई नामा व विवेकानंद जैसे लोगों को पढ़ा और ह्यूमन वेल्यू को सेंटर में रखा। जो बुध्दिज्म और हिंदुज्म के बेसिक हैं। उन्होंने बताया कि मेरी असली सोच क्या है। कहा से आए, कैसे ये दुनिया बनी, लाइफ टाइम की रिसर्च, वर्षों की खोज यह सब मेरी किताब में हैं। मेरी लाइफ में सक्सेज और फेलियर दोनों रहे। बेदी ने आगे बताया कि मेडिटेशन, शांति, होसला और सहने की ताकत देता। मैं हमेशा से विपासना करता आया हूं और अभी भी करता हूं।

जब हम फिल्म करते हैं तब कैरेक्टर की खाल को अपने ऊपर से उतारना इतना मुश्किल नहीं होता है, लेकिन जब थियेटर करते हैं और पूरी तरह उसमें रम जाते हैं। तब उसका इफेक्ट हटाना मुश्किल हो होता है। तब मेरीबीवियां कहती हैं कि जब स्टेज पर होता हूं तो मैं पूरी तरह बदल जाता हूं। मैं कई सालों से जानता था कि मेरी लाइफ की जो कहानी है। उसमें जो रोमांचक किस्से, ट्रेजडी और एग्जांपल हैं वे लोगों को बेहद पसंद आएंगे। इस लिए मैंने सोचा कि हर चैप्टर अपने आप में पूरा हो। जिससे लोगों को मेरी जिंदगी की बातें समझ आएगी।

वर्षों ये करता आ रहा हूं मेडिटेशन और विपासना

अंदर से आप मेडिटेशन से सहारा ले सकते हैं बाहर से आप असली दोस्तों का सहारा ले सकते हैं अकेलापन बहुत बुरी चीज है। जिन लोगों को आप मानते हैं उनकी राय मानते हैं उनकी सहायता लीजिए। आमतौर पर जब हम फिल्म करते हैं तो कैरेक्टर को उसकी खाल से उतारना मुश्किल नहीं होता है।लेकिन जब हम थिएटर करते हैं और एक रोल में हफ्तों के लिए रहते हैं और उसमें पूरी तरह से उतर जाते हैं तो उसका इफेक्ट इतना जल्दी उतारना आसान नहीं होता।

मेरी बीबियां हमेशा कहती हैं कि जब मैं स्टेज पर रोल करता हूं तो उसका असर मुझ पर बहुत गहरा पड़ता है। और मेरा नेचर बदल जाता है। जब मैंने ऑथेलो किया था तो उस समय पत्नी कहती थी कि मेरा नेचर पूरा बदल गया। जब मैंने शाहजहां का रोल किया था तो वहां भी कहा, जब मैंने तुगलक किया तो सब कहते थे कि मैं बदल गया हूं। वो जो हुलिया हमने जो पहन लिया है उसको उतारना स्टेज रोल के बाद मुश्किल होता है।