अदा मिसेज इंडिया दीपा मेश्राम की दुर्घटना भी नहीं तोड़ सकी हिम्मत, चुनौतियों आईं, लेकिन हार नहीं मानी
मुकेश विश्वकर्मा, भोपाल. ब्यूटी कांटेस्ट के लिए घर में किसी का समर्थन नहीं मिला, अपनों की मौत हुई तो कई जिम्मेदारियां संभाली लेकिन अपनी जिद नहीं छोडी. यहां तक कि दुर्घटना में चेहरे पर टांके तक आ गए लेकिन हौसला पस्त नहीं हुआ और अंतत: उन्होंने अपनी मंजिल हासिल कर ही ली. दलित समाज की पहली अदा मिसेज इंडिया दीपा मेश्राम Ada Mrs India Deepa Meshram का कहना है— मेरी सोच है कि हमें छोटे-छोटे कदम बढ़ाने चाहिए, तभी हम आगे बढ़ सकते हैं और कुछ नया मुकाम हासिल कर सकते हैं।
मिसेज टीन सिटी लोकल पेजेंट भाग लिया और विनर रहीं- दीपा बताती हैं कि शादी के बाद एक हादसे में जेठ और जेठानी की मौत हो गई थी। उनके दोनों बच्चों और अपनी एक बेटी की जिम्मेदारी संभालने के लिए उन्होंने जॉब छोड़ दिया। इस बीच मिसेज टीन सिटी लोकल पेजेंट भाग लिया और विनर रहीं। यहीं से उन्हें जीवन को नई दिशा मिली।
तीन महीने तक तैयारी की, लेकिन पेजेंट से पहले एक्सीडेंट हो गया- दीपा ने बताया कि अदा फाउंडेशन की ओर से आयोजित अदा मिसेज इंडिया Ada Mrs India कॉम्पीटिशन होने वाला था। ससुराल में जब बात की तो किसी का समर्थन नहीं मिला। फिर मेरी जिद के आगे सभी लोग मान गए। तीन महीने तक तैयारी की, लेकिन पेजेंट से पहले मेरा एक्सीडेंट हो गया और चेहरे पर दस टांके आए। पैर फैक्चर हो गया। मैंने हिम्मत नहीं हारी और कोशिश जारी रखी। मुझे सफलता मिली।
समाज में मिलने लगा सम्मान, अब अन्य महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए दे रही निशुल्क ट्रेनिंग -दीपा मेश्राम Deepa Meshram के मुताबिक देशभर से ब्यूटी पेजेंट में 35 महिलाओं ने भाग लिया था। यह पहला मौका रहा, जब समाज की किसी महिला ने इस तरह की प्रतियोगिता को जीता था। समाज में भी मुझे खूब सम्मान मिला। अब मैं समाज की अन्य महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए निशुल्क ट्रेनिंग दे रही हूं।